
उत्तराखंड बंद (सोर्स- गूगल)
Dehradun: अंकिता भंडारी हत्याकांड की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग को लेकर आज यानी रविवार को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया। विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के इस बंद का प्रदेशभर में मिला-जुला असर देखने को मिला। सुबह से ही कई स्थानों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही, वहीं कुछ इलाकों में बाजार और प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद नजर आए। हालांकि कई जिलों में जनजीवन सामान्य बना रहा।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बंद को राज्य की अस्मिता से जुड़ा सवाल बताया। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाने के लिए समाज के हर वर्ग को खुलकर सामने आना चाहिए। गोदियाल ने बंद को शांतिपूर्ण ढंग से सफल बनाने की अपील करते हुए कहा कि कानून हाथ में न लिया जाए।
महिला मंच की संयोजक कमला पंत ने सरकार से सीबीआई जांच के बिंदु स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ऐसी जांच होनी चाहिए, जिसमें उस कथित वीआईपी का खुलासा हो, जिसकी भूमिका पर शुरू से सवाल उठते रहे हैं। उनके अनुसार, यह लड़ाई केवल अंकिता की नहीं, बल्कि राज्य की हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई है।
राजधानी देहरादून में बंद की घोषणा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। चूंकि रविवार होने के कारण अधिकांश बाजार साप्ताहिक बंदी के चलते पहले से ही बंद रहते हैं, इसलिए बंद का असर सीमित दिखा। व्यापारिक संगठनों द्वारा बंद से दूरी बनाए जाने के कारण सड़कों पर वाहनों की आवाजाही सामान्य बनी रही।
चमोली जिले में बंद का आंशिक असर देखने को मिला। कुछ स्थानों पर व्यापारियों ने स्वेच्छा से दुकानें बंद रखीं, जबकि कई प्रमुख बाजारों में सामान्य रौनक बनी रही। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस लगातार गश्त करती रही।
सीमांत जनपद उत्तरकाशी में सुबह से ही छोटे-बड़े बाजार आंशिक रूप से बंद नजर आए। कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों की सक्रियता दिखी, हालांकि पुलिस प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखी और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
VIP कौन? सबूत मिटाने का सच क्या? (सोर्स- गूगल)
पिथौरागढ़ जिले में उत्तराखंड बंद का खास असर नहीं दिखा। रविवार की साप्ताहिक बंदी के बावजूद आवश्यक वस्तुओं की दुकानें खुली रहीं। यातायात व्यवस्था पूरी तरह सुचारू रही और आम जनजीवन पर बंद का कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा।
अंकिता भंडारी के माता-पिता की मांग को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को सीबीआई जांच की संस्तुति की थी। परिजनों द्वारा सौंपे गए पत्र को गृह सचिव के माध्यम से एसएसपी देहरादून को अग्रसारित किया गया है।
अब सीबीआई की जांच मुख्य रूप से दो अहम बिंदुओं पर केंद्रित रहेगी। पहला, उस रहस्यमयी ‘VIP’ की पहचान, जिसका नाम सामने न आने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। दूसरा, इस प्रकरण में साक्ष्य छिपाने या नष्ट करने के आरोपों की सच्चाई।
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पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। अब इसमें अंकिता के माता-पिता की शिकायत को भी शामिल किया गया है। इससे जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।
उत्तराखंड बंद भले ही पूरी तरह सफल न रहा हो, लेकिन इससे यह स्पष्ट हो गया है कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग अभी भी लोगों के दिलों में जीवित है। अब राज्य ही नहीं, पूरे देश की निगाहें सीबीआई जांच पर टिकी हैं। सवाल सिर्फ एक नहीं है क्या सच सामने आएगा, क्या दोषियों को सजा मिलेगी और क्या उस वीआईपी का नाम उजागर होगा, जिसके इर्द-गिर्द पूरा मामला घूमता रहा है।
Location : Dehradun
Published : 11 January 2026, 11:24 AM IST
Topics : Ankita Bhandari Case cbi investigation Justice For Ankita Uttarakhand Bandh Uttarakhand News