Nainital: हल्द्वानी में घर छोड़कर इसलिए भागे दो किशोर, पुलिस ने ऐसे किया सुपुर्द

नैनीताल के हल्द्वानी में बुधवार को दो किशोरों के घर से भागने की खबर है। सूचना पर जीआरपी ने उन्हें रानीखेत एक्सप्रेस पर रोककर सुरक्षित परिजनों को सौंपा।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 22 January 2026, 1:52 PM IST

Nainital:  हल्द्वानी  में मां-बाप की ड़ाट खाकर दो किशोर घर छोड़कर भाग गए। दोनों की उम्र करीब उम्र 13 और 14 साल बतायी गई। दोनों दिल्ली जा रहे थे। परिजनों की सूचना पर रात लगभग 9:45 बजे जीआरपी लालकुआं की टीम ने उन्हें रानीखेत एक्सप्रेस से पकड़कर सुरक्षित तरीके से परिजनों के हवाले किया।

जानकारी के अनुसार काठगोदाम से दिल्ली जा रही रानीखेत एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर खड़ी थी, तभी लालकुआं जीआरपी की टीम ने ट्रेन के दरवाजे के पास दो बच्चों को खड़ा देखा। पुलिस ने उनसे पूछताछ की तो बच्चों ने बताया कि वे घर छोड़कर दिल्ली जा रहे हैं।

किशोरों ने बताया कि वे शाम लगभग 4 बजे घर से निकले थे। एक किशोर ट्यूशन और दूसरा खेलने के बहाने घर से बाहर निकला। दोनों ने थोड़े-थोड़े पैसे और खाने-पीने की वस्तुएं साथ रखीं, फिर हल्द्वानी रेलवे स्टेशन पहुंचकर ट्रेन में बैठकर दिल्ली के लिए रवाना हो गये।

नैनीताल हाईकोर्ट में वकील है किशोर के पिता

दोनों बच्चों में से एक 13 वर्षीय किशोर हाईकोर्ट नैनीताल के वकील का बेटा है, जबकि दूसरा 14 वर्षीय डीपीएस हल्द्वानी में आठवीं कक्षा का छात्र है।

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बच्चों के परिजनों ने पहले ही हल्द्वानी के टीपी नगर पुलिस चौकी में बच्चों के लापता होने की तहरीर दी थी। सूचना पाकर पुलिस और परिवार दोनों बच्चों की तलाश में लगे हुए थे। इसी बीच जीआरपी की सतर्कता से दोनों बच्चों को सकुशल पकड़ लिया और टीपी नगर पुलिस को सौंप दिया।

बच्चों ने बतायी ये वजह

बच्चों ने बताया कि वे घर में मम्मी की डांट और गुस्से के चलते बड़ा आदमी बनने के लिए दिल्ली जा रहे थे। शाम 4 बजे थोड़े-थोड़े पैसे और खाने-पीने की चीजें साथ लेकर घर से निकले और हल्द्वानी रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ ली।

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परिवार ने जीआरपी लालकुआं की चौकी में पुलिस कर्मियों की तत्परता और बचाव के लिए आभार जताया।

परिजनों को सीख

किशोर उम्र में भावुक होते हैं और भावनाओं में बहकर निर्णय भी जल्दी लेते हैं। उनकी छोटी-सी नाराजगी भी बड़ा कदम बन सकती है। परिजनों को अपने बच्चों की मनोस्थित और उनके व्यवहार को समझने के लिए उनसे लगातार संवाद करना चाहिए। ताकि बच्चों के मन में उठने वाली शंकाओं और जिज्ञासाओं का समाधान करना चाहिए ताकि  नाराजगी या असुरक्षा उन्हें जोखिम भरे निर्णय तक न ले जाए।

 

Location : 
  • Haldwani

Published : 
  • 22 January 2026, 1:52 PM IST