नैनीताल जिले के ऊपरी इलाकों में महिलाओं पर हमले कर दहशत फैलाने वाले गुलदार को वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर लिया है। तीन महिलाओं की मौत के बाद चले व्यापक अभियान में यह सफलता मिली है।

गुलदार पकड़ा गया
Nainital: नैनीताल जिले के ऊपरी क्षेत्रों में पिछले कई हफ्तों से आतंक का पर्याय बने गुलदार को आखिरकार वन विभाग की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद पकड़ लिया है। लगातार महिलाओं पर हो रहे जानलेवा हमलों से पूरा इलाका खौफ में था और लोग हर दिन डर के साये में जिंदगी जीने को मजबूर थे। तीन महिलाओं की मौत के बाद यह मामला बेहद संवेदनशील हो गया था। जिसके बाद वन विभाग ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेते हुए बड़े स्तर पर अभियान शुरू किया।
बीते महीने के अंत से ही गुलदार की गतिविधियां अचानक बढ़ने लगी थीं। जंगल से निकलकर वह दिनदहाड़े आबादी वाले इलाकों की ओर आने लगा। खेतों, पगडंडियों और जंगल किनारे महिलाओं पर हमलों ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी थी। हालात ऐसे हो गए थे कि लोग जरूरी कामों के लिए भी अकेले घर से बाहर निकलने से डरने लगे।
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तारीखों पर नजर डालें तो 26 दिसंबर को धारी क्षेत्र के दीनी तल्ली गांव में गुलदार ने हेमा बरगली पर हमला कर उनकी जान ले ली थी। इसके बाद 30 दिसंबर को खन्स्यू क्षेत्र के चमोली गांव में चारा और लकड़ी लेने गई एक महिला को गुलदार ने अपना शिकार बनाया। हाल ही में 11 जनवरी को धारी ब्लॉक में एक और महिला पर हमला कर उसे जंगल की ओर घसीट ले गया। जिससे पूरे क्षेत्र में भय चरम पर पहुंच गया।
लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीणों में गुस्सा भी देखने को मिला। कई इलाकों में लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही के आरोप लगाए और गुलदार को जल्द पकड़ने की मांग की। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भारी चिंता जताई गई।
बढ़ते खतरे को देखते हुए वन विभाग ने बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया। दस से अधिक पिंजरे लगाए गए। पचास से ज्यादा कैमरे संभावित इलाकों में लगाए गए और गश्ती दलों को दिन-रात सक्रिय किया गया। जिन स्थानों पर हमले हुए थे या गुलदार की गतिविधियां देखी गई थीं। उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया।
एसडीओ ममता चंद ने बताया कि तल्ली दीनी के पास लगाए गए एक पिंजरे में एक गुलदार फंस गया है। इस क्षेत्र में मवेशियों पर भी हमला कर रहा था। इससे पहले भी एक गुलदार को पकड़ा जा चुका है। दोनों गुलदारों को रानीबाग स्थित रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा। जहां उनके सैंपल लेकर यह पुष्टि की जाएगी कि हमलों में कौन गुलदार शामिल था।
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वन विभाग ने बतया कि भले ही दो गुलदार पकड़े जा चुके हों लेकिन गश्ती टीमें अभी भी पूरे इलाके में सक्रिय रहेंगी। जिससे किसी भी तरह का खतरा दोबारा पैदा न हो और ग्रामीण बिना डर के अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी सकें।