लच्छीवाला टोल प्लाजा पर परिवहन विभाग की ई-डिटेक्शन प्रणाली अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। टोल प्लाजा संचालकों को इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश नहीं मिले हैं, जबकि दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की जांच के लिए इसे लागू किया जाना था।

टोल प्लाजा पर अटकी ई-डिटेक्शन प्रणाली,
Dehradun: परिवहन विभाग की ओर से शुरू की जाने वाली ई-डिटेक्शन प्रणाली लच्छीवाला टोल प्लाजा पर अभी तक लागू नहीं हो पाई है। यह प्रणाली दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों के दस्तावेजों की जांच के लिए तैयार की जा रही है, लेकिन फिलहाल इसकी शुरुआत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। टोल प्लाजा संचालकों को भी अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना या दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।
जानकारी के अनुसार, ई-डिटेक्शन प्रणाली को सोमवार से लागू किए जाने की बात कही जा रही थी। इसके तहत टोल प्लाजा से गुजरने वाले बाहरी राज्यों के वाहनों के दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से जांच की जानी थी। हालांकि, तय समय बीत जाने के बावजूद लच्छीवाला टोल प्लाजा पर यह प्रणाली शुरू नहीं हो सकी है।
ई-डिटेक्शन प्रणाली का उद्देश्य टोल प्लाजा पर वाहनों की जांच प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है। इस तकनीक के माध्यम से दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों के पंजीकरण, परमिट, टैक्स और अन्य जरूरी दस्तावेजों की डिजिटल जांच की जाएगी। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर भी तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
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लच्छीवाला टोल प्लाजा के असिस्टेंट मैनेजर मनीष को नेगी ने बताया कि ई-डिटेक्शन प्रणाली के बारे में उन्हें भी विभिन्न समाचार माध्यमों के जरिए जानकारी मिली थी। उन्होंने कहा कि अभी तक परिवहन विभाग की ओर से लच्छीवाला टोल प्लाजा के लिए इस प्रणाली को लेकर कोई आधिकारिक दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।
असिस्टेंट मैनेजर ने स्पष्ट किया कि जैसे ही परिवहन विभाग की ओर से लिखित या मौखिक निर्देश मिलेंगे, उसी के अनुसार आगे की व्यवस्था तैयार की जाएगी। इसके लिए जरूरी तकनीकी संसाधन, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और अन्य व्यवस्थाएं की जाएंगी। फिलहाल टोल प्लाजा पर पहले की तरह ही मैन्युअल प्रक्रिया के तहत काम किया जा रहा है।
दूसरे राज्यों के वाहनों की जांच पर ब्रेक
ई-डिटेक्शन प्रणाली के लागू न होने से दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की जांच प्रभावित हो रही है। मौजूदा व्यवस्था में सभी दस्तावेजों की पूरी जांच संभव नहीं हो पा रही है, जिससे नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन आसानी से निकल सकते हैं। इससे राजस्व को नुकसान होने के साथ-साथ यातायात नियमों के पालन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर यह मामला प्रशासनिक समन्वय की कमी की ओर भी इशारा करता है। परिवहन विभाग और टोल प्लाजा प्रबंधन के बीच स्पष्ट संवाद न होने से नई प्रणाली को लागू करने में देरी हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी डिजिटल प्रणालियों को लागू करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को समय रहते जानकारी देना जरूरी होता है।
हालांकि, टोल प्लाजा प्रबंधन को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में परिवहन विभाग की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। इसके बाद लच्छीवाला टोल प्लाजा पर भी ई-डिटेक्शन प्रणाली शुरू की जा सकेगी। इससे न सिर्फ दस्तावेजों की जांच आसान होगी, बल्कि यातायात व्यवस्था भी अधिक सुचारु हो सकेगी।
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ई-डिटेक्शन प्रणाली लागू होने से आम वाहन चालकों को भी फायदा मिलेगा। जांच प्रक्रिया तेज होने से टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी और समय की बचत होगी। साथ ही नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।