नैनीताल रोड चौड़ीकरण पर बड़ा सवाल: ट्रैफिक से छुटकारा या पर्यावरणीय संकट? मंजूरी पर टिकी नजर

काठगोदाम से नैनीताल सड़क को चौड़ा करने की 709 करोड़ की योजना से जाम से राहत की उम्मीद है, लेकिन 17,400 पेड़ों के कटान ने पर्यावरणीय चिंता बढ़ा दी है। अब सबकी निगाहें केंद्रीय मंत्रालय की मंजूरी पर टिकी हैं।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 19 January 2026, 5:42 PM IST

Nainial: काठगोदाम से नैनीताल तक की सड़क पर लगातार बढ़ते यातायात दबाव और घंटों लगने वाले जाम को देखते हुए सरकार ने इस मार्ग के चौड़ीकरण की योजना को तेज कर दिया है। पर्यटन सीजन में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, जब पर्यटकों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में कई घंटे लग जाते हैं। ऐसे में सड़क को सात से दस मीटर तक चौड़ा करने की यह योजना भविष्य के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मिलेगी राहत

सड़क चौड़ीकरण का मुख्य उद्देश्य यात्रा को सुरक्षित और सुगम बनाना है। सरकार का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद न सिर्फ जाम की समस्या से निजात मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों को भी रोजमर्रा की आवाजाही में राहत मिलने की उम्मीद है।

पेड़ों की बड़ी बाधा बनी चुनौती

हालांकि इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण से जुड़ी है। प्रस्तावित मार्ग पर करीब 17,400 पेड़ खड़े हैं, जिनके कारण सड़क विस्तार का कार्य अटक गया है। इन पेड़ों के कटान की अनुमति के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को औपचारिक प्रस्ताव भेजा जा चुका है, जिसकी मंजूरी का इंतजार किया जा रहा है।

709 करोड़ की परियोजना, भूमि हस्तांतरण साफ

इस परियोजना की वित्तीय स्वीकृति केंद्र सरकार पहले ही दे चुकी है। लगभग 709 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट के लिए 48 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण से जुड़ी अड़चनें भी अब दूर हो चुकी हैं। भूमि से जुड़ा मामला सुलझने के बाद अब केवल पेड़ कटान की अनुमति ही अगला और सबसे अहम कदम बचा है।

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वन क्षेत्र और प्रजातियों की चिंता

इस मार्ग पर चीड़, तुन, कोकाट सहित कई अन्य प्रजातियों के पुराने और घने पेड़ मौजूद हैं। इनमें से अधिकतर पेड़ नैनीताल वन प्रभाग के अंतर्गत आते हैं। वन विभाग के लिए इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों का कटान एक संवेदनशील और गंभीर निर्णय है, इसलिए इसकी अनुमति की प्रक्रिया अलग स्तर पर पूरी की जा रही है।

काठगोदाम–नैनीताल सड़क चौड़ीकरण

लंबाई और पेड़ों की संख्या में बार-बार बदलाव

परियोजना के दौरान सड़क की लंबाई और प्रभावित पेड़ों की संख्या में कई बार बदलाव किए गए। कभी सड़क को काठगोदाम से नैनीताल तक प्रस्तावित किया गया, फिर इसे घटाकर ज्योलिकोट तक सीमित कर दिया गया। बाद में दोबारा इसे पूरे नैनीताल तक बढ़ा दिया गया। इसी तरह पेड़ों की संख्या भी हर सर्वे में बदलती रही, जो कभी तीन हजार से बढ़कर 17,400 तक पहुंच गई।

डीपीआर और सर्वे में आईं बाधाएं

सर्वे और डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी उतार-चढ़ाव भरी रही। शुरुआती दौर में जयपुर की एक कंसलटेंट कंपनी अचानक काम छोड़कर गायब हो गई, जिसके बाद विभाग को उसकी सिक्योरिटी राशि जब्त करनी पड़ी। बाद में गुरुग्राम की कंपनी को जिम्मेदारी दी गई, लेकिन 2019 में वह भी बीच में काम छोड़ गई।

पर्यावरण बनाम विकास की बहस

सड़क चौड़ीकरण की यह योजना जहां भविष्य में राहत का कारण बन सकती है, वहीं इतने बड़े पैमाने पर पेड़ कटान से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने की आशंका भी जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर गहरा असर पड़ सकता है।

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मंत्रालय की मंजूरी पर टिकी निगाहें

सरकार का कहना है कि यह परियोजना पर्यटकों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए जरूरी है। पेड़ कटान की अनुमति मिलते ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल सभी की नजरें केंद्रीय मंत्रालय की मंजूरी पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह तय होगा कि यह योजना कब धरातल पर उतर पाएगी।

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  • Nainital

Published : 
  • 19 January 2026, 5:42 PM IST