उत्तराखंड के जंगलों में धधकती आग ने ली जान, चमोली में 70 मीटर गहरी खाई में गिरा फायर वाचर, रेस्क्यू टीम को मिला शव

चमोली में बदरीनाथ हाईवे के पास चीड़ के जंगल में लगी आग को बुझाते समय एक फायर वाचर की खाई में गिरने से दर्दनाक मौत हो गई। वह आग से झुलसने के बाद करीब 70 मीटर नीचे जा गिरा था, जिसका शव बृहस्पतिवार सुबह बरामद हुआ।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 May 2026, 11:03 AM IST

Chamoli: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के जंगलों में लगी आग लगातार विकराल रूप धारण करती जा रही है, जो अब इंसानी जानों पर भी भारी पड़ने लगी है। चमोली जिले के बेड़ूबगढ़ बिरही क्षेत्र में बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (हाईवे) के समीप स्थित चीड़ के घने जंगल में भीषण आग भड़क उठी। चीड़ की सूखी पत्तियों और तेज हवाओं के कारण आग ने देखते ही देखते एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया।

बदरीनाथ वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) सर्वेश दुबे ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि बीते बुधवार को दोपहर लगभग दो बजे जंगल के एक बेहद पथरीले और चट्टानी भाग पर अचानक आग धधक उठी। आग की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने चमोली रेंज के फायर वाचरों को तुरंत प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर आग पर काबू पाने के निर्देश जारी किए।

आग बुझाने गई टीम से लापता हुए राजेंद्र

वन विभाग के निर्देशों का पालन करते हुए चमोली रेंज से 15 कुशल वन कर्मियों और फायर वाचरों की एक विशेष टीम मौके पर रवाना की गई थी। इस साहसी टीम में पाखी जलगवाड़ गांव के रहने वाले 42 वर्षीय राजेंद्र सिंह नेगी (पुत्र नंदन सिंह नेगी) भी शामिल थे, जो पूरी मुस्तैदी से जंगल को बचाने की कवायद में जुटे थे। टीम ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई घंटों की कड़ी मशक्कत की।

शाम करीब सात बजे तक जब टीम ने जंगल की आग पर काफी हद तक काबू पा लिया, तो सभी कर्मचारी और फायर वाचर वापस नीचे बदरीनाथ हाईवे की तरफ मुख्य सड़क पर एकत्र होने लगे। लेकिन जब गिनती की गई, तो पता चला कि राजेंद्र सिंह नेगी बाकी साथियों के साथ वापस नहीं लौटे थे।

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रात भर चला सर्च ऑपरेशन, मिला मोबाइल

राजेंद्र सिंह के वापस न लौटने से बाकी फायर वाचरों और वन कर्मियों के बीच हड़कंप मच गया। साथियों ने तुरंत वन विभाग के आला अधिकारियों को राजेंद्र के लापता (मिसिंग) होने की सूचना दी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल चमोली के पुलिस अधीक्षक (SP) सुरजीत सिंह पंवार से संपर्क साधा। एसपी के त्वरित निर्देश पर राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस की टीम वन कर्मियों के साथ मिलकर घने जंगल और दुर्गम पहाड़ियों के बीच ढूंढ-खोज के अभियान में जुट गई।

रात करीब साढ़े दस बजे सर्च ऑपरेशन के दौरान रेस्क्यू टीम को जंगल के बीच राजेंद्र सिंह का मोबाइल फोन तो बरामद हो गया, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। अत्यधिक अंधेरा और इलाका बेहद पथरीला व खतरनाक होने के कारण रात में रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा।

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70 मीटर गहरी खाई में मिला शव, पसरा मातम

बृहस्पतिवार की सुबह होते ही एसडीआरएफ, पुलिस और वन विभाग ने एक बार फिर पूरे दमखम के साथ बड़े पैमाने पर सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआत की। गहन खोजबीन के दौरान रेस्क्यू टीम की नजर एक गहरी खाई पर पड़ी। जब टीम नीचे उतरी तो राजेंद्र सिंह नेगी चट्टानों से घिरे करीब 70 मीटर गहरे गर्त में अचेत अवस्था में पड़े मिले।

अधिकारियों के मुताबिक, आग बुझाने के दौरान राजेंद्र बुरी तरह झुलस गए थे और अनियंत्रित होकर सीधे गहरी खाई में जा गिरे। गहरी चोटों और झुलसने के कारण वह पहले ही दम तोड़ चुके थे। जांबाज फायर वाचर की इस दर्दनाक मौत की खबर मिलते ही पाखी जलगवाड़ गांव और पूरे वन विभाग में मातम पसर गया है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

Location :  Chamoli

Published :  21 May 2026, 11:03 AM IST