भगवान के दरबार में पैसो का खेल? बदरीनाथ में VIP दर्शन के नाम पर वसूले 1100 रुपये, अब होगा पाई-पाई का ऑडिट!

बदरीनाथ धाम में बिना मंदिर समिति (BKTC) की मंजूरी के श्रद्धालुओं से 1100 रुपये लेकर वीआईपी दर्शन कराने का बड़ा विवाद सामने आया है। अधिकारी इसे भीड़ नियंत्रण की तात्कालिक व्यवस्था बता रहे हैं, जबकि उपाध्यक्ष ने इसे नियमों के खिलाफ बताकर ऑडिट के आदेश दिए हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 9 July 2026, 11:52 AM IST

Dehradun: विश्व प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम से एक बड़ा और बेहद चौंकाने वाला विवाद सामने आया है। भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए आने वाले आम श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच, अब वीआईपी (VIP) दर्शन के नाम पर प्रति व्यक्ति 1100 रुपये वसूले जाने का गंभीर आरोप लगा है।

सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर खड़ा हो गया है कि बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के किसी भी आधिकारिक प्रस्ताव या मंजूरी के बिना ही इस 'शॉर्टकट' या बैक डोर व्यवस्था को लागू कर दिया गया, जिससे अब मंदिर प्रशासन के भीतर ही रार मच गई है।

मई-जून की भारी भीड़ में शुरू हुआ 'वसूली' का खेल

हर साल मई और जून के महीनों में भगवान बदरीनाथ के कपाट खुलने के बाद देश-विदेश से लाखों की संख्या में तीर्थयात्री उत्तराखंड पहुंचते हैं। यात्रियों की इसी भारी तादाद और लंबी लाइनों का फायदा उठाते हुए जून महीने के अंतिम सप्ताह से यह नई शुल्क आधारित वीआईपी व्यवस्था गुपचुप तरीके से शुरू कर दी गई। आरोप है कि जो श्रद्धालु घंटों लाइन में नहीं लगना चाहते थे, उनसे 1100 रुपये लेकर सीधे और जल्दी दर्शन करा दिए गए, जिससे आम भक्तों में भारी नाराजगी है।

प्रोटोकॉल अधिकारी पर उठी उंगली, अब होगा पाई-पाई का ऑडिट

इस पूरे विवाद के केंद्र में मंदिर समिति के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल का नाम सामने आ रहा है। आरोप है कि प्रोटोकॉल व्यवस्था संभालने के दौरान उन्होंने ही अपने स्तर पर इस शुल्क आधारित वीआईपी दर्शन व्यवस्था को हरी झंडी दिखाई थी।

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मामला जैसे ही मीडिया और उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया, इसकी शिकायत दर्ज की गई। अब इस वीआईपी दर्शन से कलेक्ट हुई पूरी रकम के स्पेशल ऑडिट की बात कही जा रही है, ताकि यह साफ हो सके कि कुल कितनी राशि इकट्ठा हुई और उसे किस खाते में जमा किया गया।

सीईओ की दलील: 'भीड़ नियंत्रण के लिए की गई थी तात्कालिक व्यवस्था'

विवाद पर सफाई देते हुए बीकेटीसी (BKTC) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने कहा कि बदरीनाथ धाम में अचानक श्रद्धालुओं की संख्या बहुत ज्यादा बढ़ गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1100 रुपये में दर्शन कराने की यह एक तात्कालिक (अस्थायी) व्यवस्था की गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पैसे के बदले श्रद्धालुओं को बकायदा रसीद दी जाती थी और एकत्र हुई पूरी धनराशि का पाई-पाई का रिकॉर्ड मंदिर समिति के पास सुरक्षित है।

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बोर्ड के नियमों की अनदेखी, उपाध्यक्ष ने खड़े किए गंभीर सवाल

दूसरी तरफ, बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने इस व्यवस्था को पूरी तरह अवैध बताते हुए मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने साफ कहा कि वीआईपी दर्शन पर शुल्क लगाने संबंधी ऐसा कोई भी प्रस्ताव समिति की बोर्ड बैठक में पास नहीं हुआ था। समिति के वरिष्ठ कानूनी जानकारों का भी कहना है कि बीकेटीसी एक्ट के तहत किसी भी प्रकार का नया शुल्क लागू करने के लिए पूरे बोर्ड की मंजूरी अनिवार्य है। बिना मंजूरी के भक्तों से पैसा वसूलना एक्ट की मूल भावना और नियमों के बिल्कुल खिलाफ है।

Location :  Dehradun

Published :  9 July 2026, 11:52 AM IST