मंत्रिमंडल विस्तार के बाद योगी कैबिनेट कृष्णावतारम फिल्म देखेगी (Img: Dynamite News)
Lucknow: उत्तर प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने का बड़ा राजनीतिक संदेश देंगे, तो दूसरी ओर शाम को भगवान श्रीकृष्ण पर आधारित फिल्म ‘कृष्णावतारम् (भाग-1)’ देखकर सनातन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का नया संकेत भी देंगे।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ का यह पूरा दिन भाजपा की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दोपहर में सत्ता और सामाजिक समीकरण का संदेश, तो शाम को हिंदुत्व और कृष्ण जन्मभूमि की वैचारिक राजनीति का संकेत दोनों को जोड़कर देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ के लोक भवन सभागार में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और सनातन गौरव पर आधारित फिल्म ‘कृष्णावतारम्’ की विशेष स्क्रीनिंग देखेंगे। कार्यक्रम में राज्यपाल भी मौजूद रहेंगी।
योगी आदित्यनाथ पहले भी कई बार कृष्ण जन्मभूमि और सनातन संस्कृति को लेकर मुखर रहे हैं। यही वजह है कि इस फिल्म स्क्रीनिंग को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक और वैचारिक संदेश माना जा रहा है।
भाजपा समर्थकों का मानना है कि अयोध्या के बाद अब मथुरा और भगवान श्रीकृष्ण की विरासत पर चर्चा और तेज हो सकती है। वहीं विपक्ष इसे 2027 की चुनावी तैयारी से जोड़कर देख रहा है।
सूत्रों के मुताबिक योगी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में कई जातीय और क्षेत्रीय चेहरों को जगह मिलेगी। भूपेंद्र चौधरी और मनोज पाण्डेय कैबिनेट मंत्री बनेंगे, वहीं कैलाश राजपूत, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कृष्णा पासवान राज्य मंत्री पद की शपथ लेंगी। भाजपा की कोशिश 2027 से पहले ओबीसी, दलित, पिछड़े और क्षेत्रीय संतुलन को और मजबूत करने की मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार सिर्फ सरकार का प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि चुनावी जमीन मजबूत करने की तैयारी भी है। भाजपा पहले ही सबका साथ-सबका विकास के साथ सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार को सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी और विपक्षी गठबंधन के सामाजिक समीकरणों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि समाजवादी पार्टी खुद को भगवान श्रीकृष्ण की परंपरा से जुड़ी पार्टी बताती रही है। ऐसे में योगी आदित्यनाथ का कृष्ण केंद्रित कार्यक्रमों में लगातार सक्रिय रहना सपा के लिए भी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है।
योगी मंत्रिमंडल विस्तार से पहले अखिलेश यादव ने दल-बदलुओं पर कसा तंज
मुख्यमंत्री कई मंचों से सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साध चुके हैं। अब ‘कृष्णावतारम्’ की स्क्रीनिंग के बाद उनके संभावित संबोधन पर भी राजनीतिक नजरें टिक गई हैं। माना जा रहा है कि योगी भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को लेकर बड़ा संदेश दे सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक योगी आदित्यनाथ ने एक ही दिन में दो अलग-अलग लेकिन जुड़े हुए संदेश देने की रणनीति बनाई है।
Location : Lucknow
Published : 10 May 2026, 1:58 PM IST
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