प्रेमानंद महाराज के आश्रम में विराट-अनुष्का क्यों घंटों तक शांत बैठे रहे, बदल गया पूरा माहौल

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने अक्षय तृतीया पर वृंदावन पहुंचकर संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और सत्संग सुना। यह उनकी पांचवीं मुलाकात रही, जहां दोनों सादगी और भक्ति में डूबे नजर आए।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 20 April 2026, 4:51 PM IST

Vrindavan: क्रिकेट की दुनिया के स्टार विराट कोहली और बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा अनुष्का शर्मा का एक बार फिर आध्यात्मिक रुख चर्चा में है। आईपीएल के व्यस्त शेड्यूल के बीच दोनों सोमवार को अक्षय तृतीया के पावन मौके पर वृंदावन पहुंचे और अपने गुरु संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। यह दोनों की संत प्रेमानंद महाराज से पांचवीं मुलाकात थी।

वृंदावन पहुंचे विराट-अनुष्का

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा रविवार देर शाम ही आईपीएल 2026 के बीच अपने बिजी शेड्यूल से समय निकालकर वृंदावन पहुंच गए थे। दोनों होटल रेडिशन में ठहरे और सोमवार सुबह करीब 6 बजे सीधे संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम केलीकुंज पहुंचे। यहां उन्होंने करीब ढाई घंटे तक समय बिताया और सत्संग में हिस्सा लिया। बाद में दोनों वराह घाट स्थित संत हित गौरांगी शरण महाराज के आश्रम भी पहुंचे।

सादगी में दिखा आस्था का रंग

आश्रम में विराट और अनुष्का पूरी तरह सादगी भरे अंदाज में नजर आए। किसी भी तरह का वीआईपी तामझाम नहीं था। दोनों आम श्रद्धालुओं की तरह जमीन पर बैठकर शांत मन से संत प्रेमानंद महाराज का सत्संग सुनते रहे। न कोई सवाल, न कोई चर्चा, बस ध्यान और भक्ति का माहौल था। वहां मौजूद लोगों ने सवाल पूछे और दोनों ने संत के जवाब ध्यान से सुने।

प्रेमानंद महाराज की सीख

सत्संग के दौरान संत प्रेमानंद महाराज ने निर्मल मन और भक्ति के महत्व पर विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि शुद्ध मन ही ईश्वर प्राप्ति का मार्ग है और धीरे-धीरे जब मन साफ होता है तो वही भगवान का अनुभव बन जाता है। उन्होंने समझाया कि जैसे साफ दर्पण में अपना प्रतिबिंब दिखता है, वैसे ही निर्मल मन में भगवान स्वयं प्रकट हो जाते हैं।

भक्ति और अहंकार पर संदेश

एक सवाल के जवाब में महाराज ने कहा कि जब भक्ति का रंग चढ़ता है तो अहंकार खत्म हो जाता है और हर जीव में भगवान का रूप दिखने लगता है। उन्होंने संत सूरदास का उदाहरण देते हुए बताया कि सच्चा भक्त खुद को सबसे छोटा मानता है और दूसरों में भगवान देखता है। यह भक्ति का असली भाव है।

वैराग्य का संकेत

प्रेमानंद महाराज ने यह भी बताया कि जब मन विषय-विलास से दूर होने लगे और एकांत की इच्छा बढ़ने लगे तो यह निर्मल मन का संकेत होता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति सत्संग की ओर आकर्षित होता है और भोग-विलास से दूरी बनाने लगता है।

Location :  Vrindavan

Published :  20 April 2026, 4:51 PM IST