
यूपी में भारी बारिश का अलर्ट (Img- Pinterest)
Lucknow: उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तरी छत्तीसगढ़ के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र (लो प्रेशर एरिया) के कारण उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया था। इस वेदर सिस्टम का रुख जैसे ही उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर हुआ, राज्य के कई जिलों में बादलों ने भारी तबाही मचाई।
बीते 24 घंटों में पूर्वी यूपी के लखीमपुर खीरी में 34 सेंटीमीटर, सीतापुर में 27 सेमी, बहराइच में 24 सेमी और बांदा में 23 सेमी तक बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं पश्चिमी यूपी के हमीरपुर में 21 सेमी और महोबा व शाहजहांपुर में 19-19 सेमी तक पानी बरसा।
मौसम विभाग ने अभी भी राज्य के लगभग 20 प्रमुख जिलों में आंधी-तूफान और बारिश की चेतावनी दी है। बहराइच, फर्रुखाबाद, गोंडा, हरदोई, कानपुर शहर, कानपुर देहात, खीरी, श्रावस्ती, उन्नाव, सीतापुर और कन्नौज में हल्की से मध्यम बारिश के साथ बिजली गिरने की आशंका है।
इसके अलावा पश्चिमी यूपी के बदायूं, बरेली, एटा, इटावा, फिरोजाबाद, कासगंज, मैनपुरी, पीलीभीत, शाहजहांपुर, रामपुर और मुरादाबाद में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से हवाएं चलने और बिजली कड़कने की संभावना जताई गई है।
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आईएमडी के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, 30 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में बारिश की गतिविधियों पर पूरी तरह ब्रेक लग जाएगा। इस पूरे इलाके में मौसम शुष्क रहने की संभावना जताई गई है।
हालांकि पूर्वी उत्तर प्रदेश में राहत के बीच कहीं-कहीं हल्की फुल्की बौछारें पड़ सकती हैं, लेकिन किसी बड़े तूफान या भारी बारिश का कोई खतरा नहीं है। इससे जलभराव की समस्या का सामना कर रहे निचले इलाकों के लोगों को काफी राहत मिलेगी।
बारिश रुकते ही उत्तर प्रदेश के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। मौसम विभाग का मानना है कि अगले तीन दिनों के भीतर दिन का अधिकतम तापमान 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। इसके साथ ही रात के न्यूनतम तापमान में भी 2 से 4 डिग्री सेल्सियस का इजाफा होने का अनुमान है। यानी बारिश के बाद अब राज्यवासियों को एक बार फिर से गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है।
बदले मौसम के बीच कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को तैयार खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का, अरहर, तिल और गन्ने के खेतों में जलजमाव न होने देने की सलाह दी है। किसानों से कहा गया है कि जब तक मौसम पूरी तरह स्थिर न हो जाए, तब तक खेतों में सिंचाई, खाद और कीटनाशकों का छिड़काव रोक दें। मौसम साफ होते ही परिवहन सेवाएं सुचारू हो जाएंगी और जलमग्न सड़कों से पानी उतरने से स्थिति सामान्य हो जाएगी।
Location : Lucknow
Published : 30 September 2026, 7:41 AM IST