उत्तर प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में महिला वोटरों का अनुपात तेजी से घटा है। प्रति हजार पुरुषों पर महिला वोटरों की संख्या 877 से घटकर 824 रह गई, जिससे चुनावी प्रक्रिया में लैंगिक असंतुलन पर सवाल उठे हैं।

महिलाओं के नाम ज्यादा क्यों कटे? (Img- Internet)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग द्वारा कराए गए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बाद जारी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट ने कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। सबसे बड़ा बदलाव महिला वोटरों के अनुपात में दर्ज किया गया है। SIR से पहले वोटर लिस्ट में प्रति 1000 पुरुषों पर 877 महिला वोटर थीं, लेकिन नई ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर 824 रह गई है। यानी वर्ष 2013 की तुलना में प्रति हजार पुरुषों पर 53 महिला वोटर कम हो गई हैं।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा के अनुसार, SIR के दौरान कुल 2.88 करोड़ नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। इनमें 1.54 करोड़ महिलाएं और 1.34 करोड़ पुरुष शामिल हैं। इस तरह पुरुषों की तुलना में लगभग 20 लाख अधिक महिलाओं के नाम काटे गए। इन आंकड़ों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर रिवीजन की प्रक्रिया का सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर ही क्यों पड़ा।
महिला वोटरों के अनुपात में सबसे ज्यादा गिरावट गाजियाबाद जिले के साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र में दर्ज की गई है। यहां जेंडर रेशियो 779 से घटकर महज 646 रह गया। यह गिरावट न सिर्फ जिला बल्कि पूरे प्रदेश में सबसे अधिक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में मतदाता स्थानांतरण और डुप्लीकेशन की समस्या ज्यादा होने से यह अंतर और गहरा हुआ है।
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अगर कुल वोटरों के आंकड़ों पर नजर डालें तो शहरी क्षेत्रों में 28 फीसदी नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हुए हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 15.23 फीसदी रहा। इससे साफ है कि शहरों में SIR का प्रभाव ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में लगभग दोगुना रहा।
सीईओ नवदीप रिणवा ने बताया कि SIR से पहले वोटर लिस्ट में 71.18 लाख ऐसी महिलाएं दर्ज थीं, जिनके नाम के आगे पिता का नाम लिखा था। रिवीजन के बाद यह संख्या घटकर 29.04 लाख रह गई। यानी 42.13 लाख नाम कट गए।
इसका मुख्य कारण विवाह के बाद महिलाओं का मायके से ससुराल स्थानांतरण बताया जा रहा है। कई मामलों में महिलाओं के नाम दो अलग-अलग जगहों पर दर्ज थे, जिससे वे डुप्लीकेट वोटर की श्रेणी में आ गईं। डुप्लीकेशन हटाने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नाम महिलाओं के ही कटे।
महिलाओं पर सबसे ज्यादा असर (Img- Internet)
SIR से पहले और ड्राफ्ट लिस्ट के आंकड़ों की तुलना करें तो तस्वीर और साफ हो जाती है:
शहरी क्षेत्र:
पहले: 4.16 करोड़
2. ड्राफ्ट लिस्ट: 2.99 करोड़
3. कटे नाम: 1.17 करोड़
ग्रामीण क्षेत्र:
पहले: 11.28 करोड़
ड्राफ्ट लिस्ट: 9.56 करोड़
2. कटे नाम: 1.72 करोड़
पुरुष वोटर
पहले: 8.24 करोड़
ड्राफ्ट लिस्ट: 6.88 करोड़
2. कटे नाम: 1.36 करोड़
महिला वोटर:
पहले: 7.21 करोड़
2. ड्राफ्ट लिस्ट: 5.67 करोड़
3. कटे नाम: 1.54 करोड़
ग्राम पंचायतों की हालिया ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में कुल 12.69 करोड़ वोटर दर्ज हैं, जबकि 2023 की नगरीय निकाय वोटर लिस्ट में 4.32 करोड़ वोटर थे। इस तरह कुल वोटरों की संख्या 17.01 करोड़ होती है, जो विधानसभा वोटर लिस्ट से करीब 4.46 करोड़ ज्यादा है।
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इस अंतर को लेकर भी सवाल उठे हैं। सीईओ का कहना है कि पंचायत वोटर लिस्ट के रिवीजन में करीब 1.41 करोड़ नाम कटे थे, जो लगभग 15 फीसदी है। ग्रामीण क्षेत्रों में SIR के दौरान भी लगभग इतने ही नाम हटाए गए।
नवदीप रिणवा ने साफ किया कि अब चुनाव आयोग का पूरा फोकस छूटे हुए वोटरों को जोड़ने पर है। प्रतिदिन 50 हजार से अधिक फॉर्म-6 प्राप्त हो रहे हैं और जल्द ही यह संख्या एक लाख प्रतिदिन से अधिक होने की उम्मीद है। सीईओ के मुताबिक, जब फाइनल वोटर लिस्ट जारी होगी, तब महिला-पुरुष अनुपात और कुल वोटरों की संख्या में यह अंतर काफी हद तक नगण्य रह जाएगा।