UP के लाखों शिक्षकों पर असर डालने वाला फैसला! तबादलों से पहले सरकार ने क्यों रोक दी पूरी प्रक्रिया?

उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के तबादलों को लेकर एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिससे हजारों शिक्षकों की उम्मीदों और योजनाओं पर असर पड़ सकता है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद शासन ने जिलों को नया आदेश जारी किया है और पूरी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 11 June 2026, 2:06 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तबादलों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों (डीएम) को पत्र भेजकर सरप्लस शिक्षकों की सत्यापित सूची मांगी है। इस प्रक्रिया के पूरा होने तक शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे।

इस फैसले का असर प्रदेश के हजारों शिक्षकों पर पड़ सकता है, जो लंबे समय से तबादला प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि पहले सरप्लस शिक्षकों की पहचान और उनके समायोजन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।

26 जून तक मांगी गई रिपोर्ट

बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश में सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर सरप्लस शिक्षकों की सूची तैयार कर शासन को भेजें। जिलाधिकारी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया 20 जून तक पूरी की जाएगी। इसके साथ ही शिक्षकों की ओर से आने वाली आपत्तियों का निस्तारण भी इसी अवधि में किया जाएगा। अंतिम सत्यापित सूची 26 जून तक शासन को उपलब्ध करानी होगी।

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कौन माने जाएंगे सरप्लस शिक्षक?

शासन के निर्देश के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम दो और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कम से कम तीन शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर जिन विद्यालयों में आवश्यकता से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं, वहां सरप्लस शिक्षकों की पहचान की जाएगी। विशेष बात यह है कि ऐसे स्कूलों में सबसे वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस माना जाएगा और आवश्यकता वाले विद्यालयों में स्थानांतरित किया जा सकता है। इसके लिए 30 अप्रैल तक उपलब्ध आंकड़ों को आधार बनाया जाएगा।

'फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट' सिद्धांत होगा लागू

सरप्लस शिक्षकों की पहचान के लिए शासन ने 'फर्स्ट इन, फर्स्ट आउट' सिद्धांत अपनाने का निर्णय लिया है। यानी जो शिक्षक लंबे समय से किसी विद्यालय में कार्यरत हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर समायोजन प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए जिलाधिकारियों को सूची का सत्यापन करने और सभी दावों एवं आपत्तियों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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तबादले का इंतजार बढ़ा

इस आदेश के बाद स्पष्ट हो गया है कि शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ेगी। पहले सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा, जिसके बाद ही सामान्य तबादलों पर विचार होगा। शिक्षा विभाग के इस कदम को स्कूलों में शिक्षकों के संतुलित वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Location :  Lucknow

Published :  11 June 2026, 2:06 PM IST