यूपी में मिठाई और दूध कारोबार के लिए कड़े नियम: अब खुली मिठाइयों पर लिखना होगा ‘यूज बाई डेट’, खतरनाक रसायनों पर भी लगा प्रतिबंध

उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिठाई विक्रेताओं के लिए बड़ा आदेश जारी किया है। अब दुकानदारों को काउंटर पर बिकने वाली खुली मिठाइयों पर भी मैन्युफैक्चरिंग और 'यूज बाई डेट' साफ-साफ लिखनी होगी। निरीक्षण के दौरान तारीख की सही जानकारी न मिलने के मामलों के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 28 September 2026, 10:03 AM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश में खाद्य सुरक्षा को एक कदम और आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं की सेहत के लिहाज से दो बड़े और महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। अब प्रदेश में मिठाई के दुकानदारों और निर्माताओं के लिए अपने उत्पादों पर निर्माण और उपयोग की अंतिम तिथि (Use by Date) की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही, दूध प्रसंस्करण इकाइयों में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।

हाल ही में हुए निरीक्षणों के दौरान यह बात सामने आई थी कि बाजार में बिकने वाली कई मिठाइयों पर तारीख से जुड़ी जानकारियां स्पष्ट रूप से नहीं दी जा रही थीं, जिससे उपभोक्ताओं में असमंजस की स्थिति रहती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए यह नई व्यवस्था लागू की गई है।

खुली मिठाइयों पर ताजगी और गुणवत्ता की जानकारी अब जरूरी

आम तौर पर डिब्बाबंद और पैक की गई मिठाइयों पर एक्सपायरी या 'यूज बाई' डेट लिखी होती है, लेकिन खुले में बिकने वाली मिठाइयों के मामले में ऐसा कोई सख्त नियम नहीं था। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग द्वारा उठाए गए इस नए कदम के तहत, अब दुकानदारों को काउंटर पर सजाई जाने वाली और भंडारित की जाने वाली सभी खुली मिठाइयों पर भी 'यूज बाई डेट' प्रदर्शित करनी होगी।

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विभाग की आयुक्त रोशन जैकब की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, अलग-अलग प्रकार की मिठाइयों की शेल्फ लाइफ (उपयोग अवधि) एक दिन से लेकर अधिकतम तीस दिन तक हो सकती है। इस अनिवार्यता से खरीदारों को यह स्पष्ट रूप से पता चल सकेगा कि वे जो मिठाई खरीद रहे हैं, उसका सेवन किस निश्चित समय सीमा के भीतर किया जाना सुरक्षित है।

उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और अधिकारों को मिलेगी मजबूती

बाजार में बिना तारीख की खुली मिठाइयां मिलने के कारण कई बार उपभोक्ताओं को उनकी ताजगी और गुणवत्ता का सही अंदाजा नहीं लग पाता था। इस नई व्यवस्था के लागू होने से लोग अपनी सेहत को लेकर अधिक सतर्क और जागरूक निर्णय ले सकेंगे।

विभाग का मानना है कि खाद्य पदार्थों की बिक्री में पारदर्शिता आने से न केवल मिलावट और बासी सामान बेचने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी, बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य हितों की भी बेहतर सुरक्षा हो सकेगी। दुकानदारों को अब अपनी दुकानों पर यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहकों को मिठाई की ताजगी से जुड़ी सही जानकारी मिल सके।

दूध प्रसंस्करण इकाइयों में खतरनाक रसायनों के इस्तेमाल पर रोक

मिठाई के नियमों के साथ-साथ सरकार ने डेयरी और दुग्ध उद्योगों को लेकर भी एक कड़ा निर्देश जारी किया है। उत्तर प्रदेश में अब दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों की प्रसंस्करण इकाइयों में 'एथिलीन ग्लाइकोल' और 'डाई एथिलीन ग्लाइकोल' जैसे खतरनाक रसायनों के प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

जांच और निरीक्षण के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया था कि कुछ डेयरियों में दूध के पाश्चुरीकरण और प्रशीतन (कूलिंग) की प्रक्रियाओं के दौरान कूलेंट के रूप में इन जहरीले रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

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लीकेज का खतरा और सुरक्षित विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, ये रसायन इंसानी सेहत के लिए बेहद खतरनाक हैं। प्रसंस्करण संयंत्रों के उपकरणों में यदि कभी कोई लीकेज या रिसाव हो जाता, तो इन रसायनों के सीधे दूध में मिलने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता था, जिससे उपभोक्ताओं का जीवन खतरे में पड़ सकता था।

इसी संभावित खतरे को टालने के लिए विभाग ने तुरंत प्रभाव से इनके उपयोग पर रोक लगा दी है। हालांकि, कारोबारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि इसके विकल्प के तौर पर 'प्रोपिलीन ग्लाइकोल' का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसका उपयोग पहले से ही प्रदेश की कई प्रतिष्ठित दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयां सुरक्षित तरीके से कर रही हैं।

Location :  Lucknow

Published :  28 September 2026, 10:03 AM IST