प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत 25 लाख वोटरों को नोटिस जारी किए गए हैं। सुनवाई शुरू हो चुकी है और फरवरी में दूसरे चरण के तहत 2.22 करोड़ मतदाताओं को नोटिस देने की तैयारी है।

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प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर बड़ा प्रशासनिक अभियान चल रहा है और इसका असर अब सीधे आम वोटर तक पहुंचने लगा है। एक तरफ लोकतंत्र की शुद्धता की बात हो रही है, तो दूसरी तरफ लाखों मतदाताओं को नोटिस थमाए जा चुके हैं। सवाल उठ रहा है कि कहीं इस प्रक्रिया में असली वोटर ही तो कटघरे में खड़े नहीं हो रहे? विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआइआर अभियान के तहत अब सुनवाई का दौर शुरू हो चुका है।
SIR अभियान का पहला चरण शुरू
प्रदेश में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत अब तक करीब 25 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। बुधवार से इन मतदाताओं की सुनवाई औपचारिक रूप से शुरू कर दी गई है। पहले चरण की यह सुनवाई 28 जनवरी तक चलेगी। जिन मतदाताओं को नोटिस दिया गया है, उन्हें अपनी पहचान और रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी प्रस्तुत करने के लिए सात दिन का समय दिया जा रहा है।
1.04 करोड़ मतदाता रडार पर
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, एसआइआर के तहत प्रदेशभर में 1.04 करोड़ ऐसे मतदाता चिह्नित किए गए हैं, जिनका रिकॉर्ड वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा रहा है। इन्हीं मतदाताओं को चरणबद्ध तरीके से नोटिस भेजे जा रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से की जा रही है।
हजारों स्थानों पर एक साथ सुनवाई
पहले ही दिन प्रदेश के 3793 स्थानों पर सुनवाई आयोजित की गई। इस बड़े प्रशासनिक अभ्यास के लिए कुल 9154 अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इनमें 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी शामिल हैं, जो सीधे तौर पर मतदाताओं के दस्तावेजों और दावों की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम बिना कारण नहीं हटाया जाएगा।
दूसरे चरण में 2.22 करोड़ वोटर
निर्वाचन विभाग की मानें तो यह प्रक्रिया अभी यहीं खत्म नहीं होने वाली। दूसरे चरण में 2.22 करोड़ ऐसे मतदाताओं को चिह्नित किया गया है, जिन्हें “तार्किक विसंगति” की श्रेणी में रखा गया है। इन मतदाताओं को फरवरी माह में नोटिस जारी करने की तैयारी चल रही है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में मतदाता सूची को लेकर हलचल और तेज होगी।
वोटरों में बढ़ी चिंता
नोटिस मिलने के बाद कई मतदाताओं में भ्रम और चिंता का माहौल है। लोग यह जानना चाह रहे हैं कि कहीं उनकी वोटर आईडी पर खतरा तो नहीं मंडरा रहा। प्रशासन हालांकि लगातार यह भरोसा दिला रहा है कि सही दस्तावेज प्रस्तुत करने वाले किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटेगा।