UP Teachers Transfer: हाईकोर्ट से प्राथमिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले पर मुहर, लेकिन रखी यह बड़ी शर्त

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने यूपी के प्राथमिक शिक्षकों की अंतरजनपदीय तबादला नीति को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि शिक्षक किसी विशेष विद्यालय में तैनाती का दावा नहीं कर सकते। तबादलों पर जिला स्तर पर नीति के अनुसार विचार किया जाएगा।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 14 August 2026, 11:56 AM IST

Lucknow: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि शिक्षक अपनी पसंद के किसी विशेष विद्यालय में तैनाती का दावा नहीं कर सकते। कोर्ट के इस फैसले से राज्य सरकार की अंतरजनपदीय तबादला नीति को राहत मिली है।

हाईकोर्ट ने खारिज की शिक्षकों की याचिकाएं

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने ऋषी कटियार सहित तीन शिक्षकों की याचिकाएं खारिज कर दीं। याचिकाओं में 22 जून 2026 के शासनादेश के तहत तबादलों के लिए तय किए गए जिलेवार छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) को चुनौती दी गई थी।

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याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि शिक्षा का अधिकार (RTE)

अधिनियम के अनुसार छात्र-शिक्षक अनुपात का निर्धारण विद्यालय और कक्षा के आधार पर होना चाहिए, न कि जिले के आधार पर।

पसंदीदा स्कूल में तैनाती का अधिकार नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि तबादला नीति के तहत शिक्षकों के आवेदन पर जिला स्तर पर विचार किया जाएगा, लेकिन किसी शिक्षक को अपनी पसंद के किसी विशेष विद्यालय में नियुक्ति का अधिकार नहीं है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरजनपदीय तबादला कोई स्वतः प्राप्त वैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि राज्य सरकार की नीति के तहत दी जाने वाली सुविधा है।

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RTE और तबादला नीति के उद्देश्य अलग-अलग

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरटीई के तहत तय छात्र-शिक्षक अनुपात और तबादला नीति में इस्तेमाल होने वाले जिलेवार छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) के उद्देश्य अलग हैं।

अदालत के अनुसार, जिलेवार PTR का उद्देश्य केवल यह तय करना है कि किन जिलों में शिक्षकों के तबादले किए जा सकते हैं। इससे विद्यालयों में आरटीई के तहत निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात प्रभावित नहीं होता।

विशेष परिस्थितियों में मिलेगा तबादले का लाभ

तबादला नीति में विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय तबादले का प्रावधान रखा गया है। इसमें ऐसे पति-पत्नी भी शामिल हैं, जो दोनों बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं और अलग-अलग जिलों में कार्यरत हैं।

ऐसे मामलों में कम छात्र-शिक्षक अनुपात वाले जिलों में निर्धारित नियमों के तहत आवेदन पर विचार किया जा सकता है।

Location :  Lucknow

Published :  14 August 2026, 11:51 AM IST