यूपी में बिजली की मार उपभोक्ताओं पर कितनी भारी?

यूपी में बिजली आपूर्ति की अनियमितता, जर्जर तार, ओवरलोड ट्रांसफार्मर और महंगे बिलों से उपभोक्ता परेशान हैं। सरकारी और निजी कंपनियों की दरें अलग-अलग होने के बावजूद राहत नहीं मिल रही। वहीं नलकूप और जल जीवन मिशन योजनाएं भी अधूरी हैं, जिससे पेयजल संकट गहरा गया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 May 2026, 1:07 PM IST

Lucknow: अनुमंडलीय क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की लगातार बिगड़ती स्थिति और पेयजल योजनाओं की जमीनी विफलता ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। अनियमित बिजली कटौती, फॉल्ट, ओवरलोड ट्रांसफार्मर और जर्जर तारों की समस्या से त्रस्त उपभोक्ताओं तत्काल सुधार की मांग की है। वहीं दूसरी ओर नलकूप और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं भी कई जगहों पर अधूरी पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है।

लगातार घंटों बिजली गुल, जनजीवन प्रभावित

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। प्रतिदिन कई-कई घंटों तक बिजली गायब रहती है। इससे पेयजल आपूर्ति, सिंचाई, खेती, छात्रों की पढ़ाई, छोटे व्यापार और घरेलू कार्य सभी प्रभावित हो रहे हैं।

लोगों का आरोप है कि थोड़ी सी आंधी या बारिश में भी घंटों बिजली ठप हो जाती है। कई इलाकों में आज तक डबल लाइन की व्यवस्था नहीं की गई है। जहां अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की जरूरत है, वहां भी सुधार नहीं हुआ, जबकि कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर बार-बार खराब हो रहे हैं।

UP News: आखिर गाजीपुर में ही क्यों बिजली में रोज 6 घंटे की कटौती? जानिए पूरा मामला

जर्जर तार और बार-बार फॉल्ट से आपूर्ति बाधित

ग्रामीणों का कहना है कि कई जगहों पर एलटी लाइन के तार बेहद घटिया गुणवत्ता के हैं। ये तार आपस में सटकर आग लगने जैसी घटनाओं को जन्म दे रहे हैं। 'फॉल्ट', 'फ्यूज उड़ना', 'शॉर्ट सर्किट', 'लोड सेटिंग' और 'पावर जीरो' जैसी समस्याएं रोजाना सामने आ रही हैं। इससे बिजली आपूर्ति बार-बार बाधित होती है, जिससे उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

बिजली आपूर्ति रोस्टर और दावों की हकीकत

राज्य विद्युत निगम के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा किया जाता है। वहीं तहसील और नगर पंचायत क्षेत्रों में 21-22 घंटे, बुंदेलखंड क्षेत्र में 20 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों में औसतन 18 घंटे बिजली आपूर्ति का रोस्टर निर्धारित है।

हालांकि उपभोक्ताओं का कहना है कि यह रोस्टर केवल कागजों तक सीमित है। कई बार बिजली कुछ सेकंड के लिए आती है और फिर चली जाती है।

बिजली दरें: सरकारी और निजी कंपनियों का अंतर

उत्तर प्रदेश में बिजली दरें स्लैब के अनुसार तय हैं। शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 0 से 150 यूनिट तक लगभग 5.50 रुपय प्रति यूनिट, 151 से 300 यूनिट तक 6.00 रुपय और 300 यूनिट से अधिक पर 6.50 रुपय प्रति यूनिट दर लागू है।

ग्रामीण क्षेत्रों में 0 से 100 यूनिट तक 3.35 रुपय प्रति यूनिट, 101 से 150 यूनिट तक 3.85 रुपय और 300 यूनिट से ऊपर 5.50 रुपय प्रति यूनिट तक दर निर्धारित है।

व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए दरें अधिक हैं, जो लगभग 7 रुपय से 10 रुपय प्रति यूनिट तक पहुंच जाती हैं।

ग्रेटर नोएडा की निजी कंपनी NPCL और आगरा क्षेत्र की टोरेंट पावर में भी दरें लगभग 5.50 रुपय से 6.50 रुपय प्रति यूनिट के बीच हैं, जबकि फिक्स चार्ज अतिरिक्त रूप से लिया जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगे बिल के बावजूद उन्हें निर्बाध बिजली नहीं मिल रही।

Sonbhadra News: दो महीने से अंधेरे में डूबा जोरबा गांव, खराब ट्रांसफार्मर नहीं बदला, ग्रामीणों में गहरा आक्रोश

नलकूप और जल जीवन मिशन पर सवाल

दूसरी ओर पेयजल योजनाओं की स्थिति भी गंभीर है। जलालपुर नगर पालिका क्षेत्र के कई इलाकों में ‘हर घर जल’ योजना अधूरी पड़ी है। लाखों रुपये खर्च कर नलकूप तो लगाए गए, लेकिन पाइपलाइन न बिछने के कारण कई क्षेत्रों में पानी आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के बाद पाइपलाइन बिछाने में कठिनाई होगी, जिससे सरकारी धन की बर्बादी होगी। कुछ जगहों पर पाइप फटने और जलापूर्ति बाधित होने की भी शिकायतें सामने आई हैं।

करोड़ों की जल जीवन मिशन योजना अधूरी

बस्ती जिले के कुदरहा क्षेत्र के ग्राम बारीघाट में जल जीवन मिशन की स्थिति और भी गंभीर है। 3.38 करोड़ रुपये की योजना के बावजूद नलकूप से पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। ओवरहेड टैंक, पाइपलाइन और अन्य कार्य अधूरे पड़े हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तीन साल बीत जाने के बाद भी उन्हें शुद्ध पेयजल नहीं मिल पाया है और वे हैंडपंप या अन्य स्रोतों पर निर्भर हैं।

Location :  Lucknow

Published :  17 May 2026, 1:07 PM IST