उत्तर प्रदेश के बदायूं से ऐसी तस्वीर सामने आई हैं जिसने जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई तरह की टिप्पणी करनी शुरू कर दी है।

बदायूं में स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल
Badaun: जिले के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की बदहाल तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। जिला अस्पताल में मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक न मिल पाने से स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड तक बीमार मरीज को चारपाई से पहुंचाने का वीडियो सामने आया। जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है।
घायल मरीज की पहचान कासिम (25) पुत्र लल्लन निवासी खुलैट थाना बिल्सी के रूप में हुई है।
यह दृश्य किसी एक मरीज की पीड़ा नहीं, बल्कि बदायूं की पूरी सरकारी चिकित्सा व्यवस्था की सच्चाई को दर्शाता है। नियमों के अनुसार, किसी भी बीमार या घायल व्यक्ति के अस्पताल पहुंचते ही वार्ड बॉय, अटेंडर स्टाफ और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों की यह ड्यूटी होती है कि मरीज को तुरंत स्ट्रेचर उपलब्ध कराया जाए और उसे इमरजेंसी कक्ष तक सुरक्षित पहुंचाया जाए। लेकिन यहां मरीज चारपाई पर ही अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के भीतर तक पहुंच गया, जो व्यवस्था की गंभीर लापरवाही को उजागर करता है।
मरीज को इमरजेंसी में ले जाते परिजन
परिजनों ने बताया कि मरीज की हालत गंभीर थी। एंबुलेंस या छोटे वाहन की सुविधा न मिलने के कारण वे उसे बड़े वाहन में चारपाई सहित अस्पताल लेकर आए। जान बचाने की जद्दोजहद में परिजन किसी तरह मरीज को इमरजेंसी तक पहुंचाने में सफल तो हो गए, लेकिन अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई सहयोग नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि अगर समय पर मदद न मिलती तो मरीज की जान भी जा सकती थी।
अस्पताल में तैनात वार्ड बॉय, अटेंडर स्टाफ और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि न तो समय पर स्ट्रेचर उपलब्ध कराया गया और न ही मरीज को वार्ड में शिफ्ट करने में कोई तत्परता दिखाई गई। यह लापरवाही सीधे तौर पर मरीज की जान के साथ खिलवाड़ मानी जा रही है।
बदइंतजामी, बदतमीजी और उगाही के आरोप
स्थानीय लोगों का कहना है कि बदायूं जिला अस्पताल अब बदइंतजामी, बदतमीजी और कथित उगाही के लिए बदनाम होता जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों को अक्सर स्टाफ के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है, जबकि सुविधाएं नाम मात्र की रह गई हैं।
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मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमजन और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में तत्काल सुधार किया जाए और लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी मरीज को ऐसी अमानवीय स्थिति का सामना न करना पड़े।