
हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला,
Prayagraj News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रूख अपनाने के बाद से ही दाखिल एक जनहित याचिका को खारिज करने के बाद कहा कि कानून प्रक्रिया का घोर दुरूपयोग हो रहा है। इनके जीवन को लेकर बात करें तो केवल निजी जीवन जीना प्रतीत होने लगता है।
दाखिल जनहित याचिका को खारिज...
इस संबंध में दाखिल एक जनहित याचिका को खारिज करने के बाद बताया गया कि याचिका "कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग" है और इसका उद्देश्य केवल निजी बदला लेना प्रतीत होने लग जाता है।न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकल पीठ ने मनीष कुमार द्वारा दाखिल जनहित याचिका को खारिज करने के बाद पारित किया गया और याची पर 15,000 का जुर्माना भी लगाया जा चुका है।
संपत्ति को लेकर संख्या 6 के खिलाफ एक याचिका..
कोर्ट ने पाया कि याचिका भी इस संपत्ति को लेकर संख्या 6 के खिलाफ एक याचिका दाखिल किया जाता है। इसमें अनुमति लिए बिना वापस लिया जा चुका है। इसको लेकर कोर्ट ने बताया है किउसने पूर्व याचिका का जिक्र करने के बाद बिना दोबारा वही मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट ने इसे न्यायालय के साथ "लुका-छिपी" और "सत्य को दबाने का प्रयास" करार दिया जा चुका है।
वसूली सुनिश्चित करने का आदेश
विपक्षी के अधिवक्ता ने याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति उठा दिया गया था। इसको कोर्ट द्वारा उचित ठहराया गया है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर विभिन्न फैसलों को हवाला देकर हुए कहा कि सत्य क दबाकर दाखिल याचिका कोई राहत पाने के योग्य नहीं किया जाता है। कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि याची ने खुद को सामाजित कार्यकर्ता के तौर पर बता दिया है। इस दावे का समर्थन में कोई प्रमाण नहीं मिला कि उसका उद्देश्य केवल ही सार्वजनिक हित नहीं है, बल्कि शत्रुता को भी निभाना है।
याची द्वारा जुर्माने का भुगतान न करने की स्थिति को लेकर देखा जाए तो कलेक्टर हाथरस को वसूली सुनिश्चित करने का आदेश दिया जा चुका है।
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Location : Prayagraj
Published : 29 July 2025, 4:47 PM IST
Topics : Decision High Court Latest News petitioner Prayagraj