
ताजमहल का ‘कर्जन चेहरा’
Agra: दुनिया के सात अजूबों में शामिल ताजमहल आज जिस रूप में नजर आता है, वह हमेशा ऐसा नहीं था। मुगल शासन के कमजोर पड़ने के बाद यह ऐतिहासिक धरोहर उपेक्षा का शिकार हो रही थी, लेकिन ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड कर्जन के कार्यकाल में इस स्मारक के संरक्षण ने इसकी किस्मत बदल दी। 1901 में शुरू हुए उनके प्रयासों ने न सिर्फ ताजमहल को संरक्षित किया, बल्कि इसके सौंदर्य और संरचना को भी एक नया रूप दिया, जिसकी झलक आज भी यहां आने वाले पर्यटक महसूस करते हैं।
मुगल सल्तनत के पतन के बाद ताजमहल की देखरेख लगभग बंद हो गई थी। धीरे-धीरे सेंट्रल टैंक और आसपास की नहरों के किनारे घना जंगल उग आया। बड़े-बड़े पेड़ों और झाड़ियों के कारण स्थिति ऐसी हो गई थी कि रॉयल गेट और सेंट्रल टैंक से केवल मुख्य गुंबद ही दिखाई देता था। यह स्थिति स्मारक की भव्यता के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थी।
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ब्रिटिश भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन (1899-1905) ने ताजमहल के संरक्षण का कार्य 1901 में शुरू कराया। उनके प्रयासों से स्मारक की संरचना को स्थिर किया गया और उसके खोए हुए गौरव को फिर से बहाल करने की दिशा में बड़े कदम उठाए गए। उनके नेतृत्व में ताजमहल के आसपास के अवैध निर्माण और तोड़फोड़ पर भी रोक लगाने की दिशा में कानूनी ढांचा तैयार हुआ।
कर्जन ने सबसे पहले ताजमहल परिसर में फैली झाड़ियों और ऊंचे पेड़ों को हटवाया। इसके बाद बगीचे के लेआउट को व्यवस्थित कर लॉन तैयार कराए गए। इससे ताजमहल की दृश्यता में बड़ा सुधार हुआ और यह फिर से अपनी मूल भव्यता के साथ नजर आने लगा। यह कदम ताजमहल के संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
ताजमहल के सेंट्रल टैंक पर मौजूद चार संगमरमर की बेंच भी लॉर्ड कर्जन की ही देन मानी जाती हैं। पूर्व संरक्षण सहायक सर्वेश कुलश्रेष्ठ के अनुसार, 1907 में कर्जन ने वहां मौजूद पुरानी और भद्दी कुर्सियों को हटवाकर मुगलिया डिजाइन की चार संगमरमर बेंच लगवाई थीं। इन्हीं बेंचों में से एक पर 1992 में ब्रिटिश राजकुमारी डायना बैठी थीं, जिसके बाद यह जगह ‘डायना बेंच’ के नाम से मशहूर हो गई।
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एएसआई के पूर्व अधिकारी डॉ. आरके दीक्षित के अनुसार, लॉर्ड कर्जन मिस्र यात्रा के दौरान काहिरा में सुल्तान बैबर के मकबरे के झूमरों से प्रभावित हुए थे। इसके बाद उन्होंने काहिरा के कारीगरों से ताजमहल के मुख्य गुंबद और रॉयल गेट के लिए विशेष लैंप बनवाए। इन्हें 16 फरवरी 1908 को शाहजहां और मुमताज की कब्रों के ऊपर स्थापित किया गया। इन लैंपों पर फारसी में यह भी अंकित है कि यह मुमताज महल के मकबरे को लॉर्ड कर्जन की भेंट है।
लॉर्ड कर्जन ने ताजमहल परिसर के फोरकोर्ट में छह लाइटें लगवाईं, जिन्हें कुषाण काल की शैली में डिजाइन किया गया था। यह प्रेरणा उन्हें मथुरा संग्रहालय में रखे कुषाण कालीन अवशेषों से मिली थी। इसके अलावा उन्होंने ताजमहल में एक संग्रहालय (म्यूजियम) की स्थापना भी कराई, जिससे इसकी ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित और प्रदर्शित किया जा सके।
Location : Agra
Published : 9 June 2026, 10:36 AM IST