DN Exclusive: सुप्रीम कोर्ट ने CM योगी सरकार को क्यों लगाई फटकार? जानें बड़ी वजह

कोर्ट ने साफ कहा है कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ अदालत के दबाव में नहीं हो सकता। इस प्रकार की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी केवल केस तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये पूरे सिस्टम पर सवाल है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 27 May 2026, 2:57 PM IST

New Delhi: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी ने एक बार फिर पर्यावरण सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि पर्यावरण संरक्षण सिर्फ अदालत के दबाव में नहीं हो सकता। इस प्रकार की सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी केवल केस तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये पूरे सिस्टम पर सवाल है।

जमीनी अमल के बीच अंतर साफ

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश को कड़े निर्देश देते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाने नियंत्रण केंद्र बनाने और ठेकेदारों, मशीन संचालकों पर कार्रवाई के आदेश दिए है। अदालत ने यह भी कहा कि पर्यावरण सुरक्षा सरकार की प्रथामिक जिम्मेदारी है, जिसे केवल न्यायिक हस्तक्षेप के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। मामले की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि कोर्ट ने अधिकारियों की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए। अदालत की टिप्पणी के अनुसार अगर अधिकारियों की जानकारी सही थी तो अवैध खनन रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं  हुई ? इससे प्रशासनिक निगरानी और जमीनी अमल के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।

जैव विविधता के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र

राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य जैव विविधता के लिहाद से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है, जहां घड़ियाल, गंगा डॉल्फिन और रेड-क्राउन्ड रुफ्ड टर्टल जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। ऐसे इलाके में अवैध खनन केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सीधा खतरा माना जा रहा है।

संदिग्ध वाहनों की जांच

कोर्ट ने मुरैना-धौलपुर मार्ग पर रियल-टाइम सीसीटीवी निगरानी, संदिग्ध वाहनों की जांच और अवैध खनन नेटवर्क से जुड़े लोगों के आर्थिक संबंधों की पड़ताल के भी निर्देश दिए हैं। यह दिखाता है कि अब फोकस सिर्फ कार्रवाई पर नहीं बल्कि पूरे नेटवर्क को समझने और तोड़ने पर है।

जवाबदेही और राज्यों के बीच समन्वय

यह मामला इस बात को साफ करता है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए केवल आदेश या अभियान काफी नहीं हैं। जरूरत है निरंतर निगरानी, जवाबदेही और राज्यों के बीच समन्वय की। सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ है कि अगर प्रशासन समय पर सक्रिय होता, तो अदालत को बार-बार दखल देने की जरूरत नहीं पड़ती। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि तीनों राज्य अदालत के निर्देशों को जमीन पर कितना लागू कर पाते हैं और क्या इससे चंबल क्षेत्र में अवैध खनन पर वास्तव में रोक लगेगी।

Location :  New Delhi

Published :  27 May 2026, 2:39 PM IST