
सुप्रीम कोर्ट (Img: Pinterest)
Agra: आगरा की चंबल सैंक्चुअरी में लंबे समय से हो रहे अवैध बालू खनन और उससे पर्यावरण को हो रहे नुकसान का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में आज सुनवाई होनी है। सुनवाई से पहले सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (CEC) ने अपनी चौथी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण निर्देशों के पालन में देरी और लापरवाही का उल्लेख किया गया है।
सीईसी की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारें अब तक चंबल सेंक्चुअरी की सुरक्षा के लिए एक समान कार्ययोजना और मॉडल स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार नहीं कर सकी हैं। इसके अलावा वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने भी चंबल नदी के ईको सिस्टम पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की है। इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रयास प्रभावित हो रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी को अब तक अनुपालन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई है। हालांकि, तीनों राज्य सरकारों ने कुछ जरूरी कदम उठाए हैं। इनमें नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, निगरानी तंत्र को मजबूत करना, प्रवर्तन टीमों का गठन और आवश्यक अधिसूचनाएं जारी करना शामिल है।
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सीईसी के सदस्य सचिव डॉ. सतीश सी. गरकोटी ने रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि केवल सेंक्चुअरी क्षेत्र की राजस्व भूमि को संरक्षित या आरक्षित वन घोषित करने की सिफारिश की गई है। ग्राम समाज या निजी भूमि को इसमें शामिल करने की बात नहीं कही गई है। यह सिफारिश भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 52 के तहत वन विभाग को अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाली रेत और उपकरण जब्त करने के अधिकार प्रभावी बनाने के उद्देश्य से की गई है।
सुप्रीम कोर्ट आज सीईसी की रिपोर्ट पर सुनवाई करेगा। माना जा रहा है कि यदि निर्देशों के पालन में कमी पाई गई तो संबंधित विभागों और अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इस सुनवाई से चंबल सेंक्चुअरी में अवैध खनन रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे की रणनीति भी तय हो सकती है।
Location : Agra
Published : 11 August 2026, 12:59 PM IST
Topics : Agra news Chambal River Uttar Pradesh News