Sultanpur News: सुल्तानपुर में हरियाली के लिए करोड़ों के खर्च पर उठने लगे सवाल

सुल्तानपुर जिले में पर्यावरणीय संतुलन सुधारने और हरियाली बढ़ाने के लिए पिछले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाए गए। वन, ग्राम विकास और पंचायती राज समेत कई विभागों की सहभागिता से वर्ष 2022 से 2026 के बीच लगभग 2.44 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 11 August 2026, 5:11 PM IST

Sultanpur: सुल्तानपुर जिले को हरा-भरा बनाने और पर्यावरणीय संतुलन मजबूत करने के लिए पिछले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान चलाए गए। वन विभाग के साथ ग्राम विकास, पंचायती राज, कृषि, उद्यान, नगर विकास और अन्य सरकारी विभागों ने पौधरोपण में भागीदारी की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 से 2026 तक जिले में करीब 2.44 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य निर्धारित किए गए। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन अभियानों में लगाए गए पौधों में से कितने आज जीवित हैं और कितने सूख चुके हैं?

पौधरोपण के आंकड़े हर वर्ष प्रशासनिक उपलब्धि के रूप में सामने आते हैं, लेकिन पांच वर्षों में लगाए गए पौधों के सर्वाइवल रेट का एकीकृत और सार्वजनिक जिला स्तरीय आंकड़ा सामने नहीं है। ऐसे में यह आकलन करना मुश्किल है कि करोड़ों पौधे लगाने के दावे का वास्तविक पर्यावरणीय लाभ कितना हुआ।

हर साल करोड़ों पौधों का लक्ष्य

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2022 में जिले में करीब 43.47 लाख, 2023 में 51.35 लाख, 2024 में 53.48 लाख, 2025 में करीब 48.53 लाख और वर्ष 2026 में 47.22 लाख पौधों का लक्ष्य निर्धारित किया गया। इन पांच वर्षों के लक्ष्यों को जोड़ने पर संख्या करीब 2.44 करोड़ पौधे बैठती है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह संख्या वर्षवार निर्धारित लक्ष्यों का योग है। इसे यह नहीं माना जा सकता कि इतने पौधे आज भी जीवित हैं।

सुल्तानपुर में पौधरोपण (Img: Dynamite News)

2026 में लक्ष्य घटा, संरक्षण पर जोर

वर्ष 2026-27 के लिए सुल्तानपुर में 47,22,181 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिले की 979 ग्राम पंचायतों में पौधरोपण की रूपरेखा तैयार की गई है। वन विभाग की 22 नर्सरियों में लक्ष्य से काफी अधिक पौध तैयार किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पौधरोपण के बाद उनकी सुरक्षा, सिंचाई और संरक्षण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को दिए जाने की बात कही गई है। जिला वृक्षारोपण समिति की समीक्षा बैठक में भी प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षित एवं विकसित करने से सुनिश्चित होगी। अधिकारियों को पौधों की फेंसिंग और ट्रीगार्ड की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए।

संरक्षण की व्यवस्था पर रहेगा जोर

प्रभागीय वनाधिकारी अमित सिंह के अनुसार इस वर्ष शासन से मिले लक्ष्य को पूरा करने के साथ-साथ पौधों के संरक्षण की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 23 विभागों के माध्यम से पौधरोपण लक्ष्य पूरा किया जाएगा और लगाए गए पौधों को संरक्षित करने की व्यवस्था की जाएगी। डीएफओ के मुताबिक पौधरोपण अभियान को केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय पौधों की सुरक्षा और देखरेख पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए संबंधित विभागों और ग्राम पंचायतों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।

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हर साल करीब 50 लाख पौधे, लेकिन कितने बचते हैं?

जुलाई 2026 की रिपोर्ट में वन विभाग के हवाले से यह सवाल सामने आया कि जिले में हर वर्ष करीब 50 लाख पौधे लगाए जाते हैं, लेकिन संरक्षण और संसाधनों के अभाव में अधिकांश पौधे कुछ समय बाद सूख जाते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जिन पौधों को नियमित देखरेख, पानी और सुरक्षा मिली, उनके बचने की संभावना अधिक रही। यही बिंदु पौधरोपण अभियान की वास्तविक सफलता को लेकर सबसे महत्वपूर्ण है। एक पौधा लगाना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन उसे कई वर्षों तक पानी, सुरक्षा और देखरेख देकर पेड़ बनाना असली चुनौती है।

2023 के पौधरोपण के सत्यापन पर भी उठे थे सवाल

पौधरोपण के बाद उसकी निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2024 में हुई जिला स्तरीय बैठक में वर्ष 2023 के पौधरोपण की अंतर्विभागीय सत्यापन रिपोर्ट लंबित होने का मुद्दा सामने आया था।

इससे यह सवाल उठता है कि जिस अभियान में लाखों-करोड़ों पौधे लगाए जाते हैं, क्या उनका एक, दो और तीन वर्ष बाद नियमित भौतिक सत्यापन भी हो रहा है? यदि सत्यापन होता है तो उसका परिणाम सार्वजनिक रूप से सामने क्यों नहीं आता?

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एक पौधे की उम्र तय करती है अभियान की सफलता

पौधरोपण अभियान की सफलता का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि कितने पौधे लगाए गए। असली पैमाना यह होना चाहिए कि, एक साल बाद कितने पौधे जीवित रहे? दो साल बाद कितने बचे? तीन साल बाद कितने पेड़ बनने की स्थिति में पहुंचे? यदि किसी अभियान में 10 लाख पौधे लगाए गए और एक साल बाद केवल तीन लाख जीवित मिले तो उपलब्धि का आंकड़ा 10 लाख नहीं, बल्कि तीन लाख के सर्वाइवल के आधार पर देखा जाना चाहिए।

सात नए विशिष्ट वन भी विकसित किए जा रहे

वन विभाग जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए नए विशिष्ट वन विकसित करने की दिशा में भी काम कर रहा है। जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार जिले में सात नए वनों के विकास की तैयारी की गई है। लंभुआ क्षेत्र के पठखौली में समरस वन की स्थापना के बाद अन्य निर्धारित स्थलों पर भी पौधरोपण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। ऐसी परियोजनाओं की सफलता भी इस बात पर निर्भर करेगी कि रोपे गए पौधों का संरक्षण कितनी प्रभावी ढंग से किया जाता है।

सुल्तानपुर में पौधरोपण (Img: Dynamite News)

सवाल सिर्फ पौध लगाने का नहीं, बचाने का है

पिछले पांच वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि जिले में हर साल लाखों पौधे लगाने के लिए बड़े लक्ष्य तय किए गए। पांच साल में इन लक्ष्यों का योग करीब 2.44 करोड़ बैठता है। लेकिन इन पौधों में से वर्तमान में कितने जीवित हैं, इसका प्रमाणित और समेकित आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए अब जरूरत पौधरोपण के नए लक्ष्य गिनाने से अधिक पुराने पौधों का सर्वाइवल ऑडिट कराने की है।

वन विभाग से मांगा जाना चाहिए पांच साल का सर्वाइवल डेटा

विशेषज्ञों और पर्यावरण से जुड़े लोगों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि वन विभाग और संबंधित विभाग वर्ष 2022 से अब तक लगाए गए पौधों का वर्षवार सर्वाइवल रिकॉर्ड जारी करें। इसमें यह बताया जाए कि

- कितने पौधे वास्तव में लगाए गए?

- कितने पौधे एक वर्ष बाद जीवित मिले?

- दो वर्ष बाद कितने बचे?

- तीन वर्ष बाद कितने पौधे पेड़ बनने की स्थिति में पहुंचे?

- कितने पौधे सूख गए या नष्ट हो गए?

- सूखे पौधों के स्थान पर दोबारा पौधरोपण किया गया या नहीं?

- कितने पौधों की जियो-टैगिंग हुई?

- कितने रोपण स्थलों का भौतिक सत्यापन किया गया?

- पौधों की सुरक्षा और सिंचाई पर कितना खर्च हुआ?

सुल्तानपुर में पौधरोपण के बाद सूखे पौधे (Img: Dynamite News)

सुल्तानपुर में पौधरोपण के आंकड़े निश्चित रूप से उत्साहजनक हैं, लेकिन पर्यावरण संरक्षण की असली कसौटी लक्ष्य पूरा करना नहीं, पौधों को जीवित रखना है। डीएफओ अमित सिंह का संरक्षण पर जोर और जिला प्रशासन द्वारा ट्रीगार्ड, फेंसिंग व देखरेख के निर्देश यह संकेत देते हैं कि अब पौधरोपण के साथ सर्वाइवल पर भी ध्यान दिया जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है, पांच साल में जिन करीब 2.44 करोड़ पौधों को लगाने का लक्ष्य रखा गया, उनमें से आज कितने पौधे सुल्तानपुर की धरती पर पेड़ बनकर खड़े हैं?

इस सवाल का जवाब तभी मिलेगा, जब विभाग पुराने पौधरोपण का वर्षवार सर्वाइवल ऑडिट सार्वजनिक करेगा। तब पता चलेगा कि पौधरोपण के सरकारी आंकड़ों में दर्ज हरियाली और सुल्तानपुर की जमीन पर दिखाई देने वाली हरियाली के बीच कितना अंतर है।

Location :  Sultanpur

Published :  11 August 2026, 5:11 PM IST