सोनभद्र जनपद के विकास खण्ड कोन अंतर्गत बीपैक्स (सहकारी समिति) कचनरवा केंद्र पर किसान त्रस्त हैं। किसानों का आरोप है कि केन्द्र प्रभारी की मनमानी और अपनी पसंद के मिलर व अन्य किसानों को वरीयता देने के कारण धान खरीदी में गंभीर अनियमितता हो रही है।

प्रभारी की मनमानी से किसान परेशान
Sonbhadra: सोनभद्र जनपद के विकास खण्ड कोन अंतर्गत बीपैक्स (सहकारी समिति) कचनरवा केंद्र पर किसान त्रस्त हैं। किसानों का आरोप है कि केन्द्र प्रभारी की मनमानी और अपनी पसंद के मिलर व अन्य किसानों को वरीयता देने के कारण धान खरीदी में गंभीर अनियमितता हो रही है। किसानों का कहना है कि केन्द्र अचानक लक्ष्य पूरा होने का बहाना बना कर बंद कर दिया गया, जिससे स्थानीय किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
किसानों का आरोप है कि केन्द्र प्रभारी द्वारा धान तौलने के बाद प्रति कुंतल 8 से 10 किलो की कटौती की जा रही है। इसके अलावा बायोमैट्रिक अंगूठा न लगाने के कारण किसानों को महीनों से बीपैक्स का चक्कर लगाना पड़ रहा है। किसानों ने बताया कि केन्द्र प्रभारी ने अपने चहेतों और अन्य क्षेत्रों के किसानों को वरीयता दी और सरकारी मंशा के विपरीत अनियमितता की।
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किसानों ने जिलाधिकारी समेत संबंधित विभाग से मांग की है कि केन्द्र पर अब तक जिन किसानों का धान खरीदा गया है उनकी सूची सार्वजनिक रूप से चस्पा की जाए और खरीदी का सत्यापन किया जाए। इसके साथ ही दोषी केन्द्र प्रभारी के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। सपा नेता जोखन प्रसाद ने बताया कि जनपद में कुल 27 हजार से अधिक किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से अभी 11 हजार से अधिक किसानों का धान क्रय होना बाकी है। उन्होंने चेताया कि धान खरीदी की अंतिम तिथि 28 फरवरी है, लेकिन केन्द्र प्रभारी की मनमानी से किसानों को धान बेचने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
केंद्र प्रभारी उदयवीर ने कहा कि सूची जन सूचना अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत ली जा सकती है। वहीं, एडीसीओ अवधेश सिंह ने बताया कि जनपद का लक्ष्य पूरा हो गया है, लेकिन जिन किसानों का धान तौलकर समिति में पहुँच चुका है, उनकी सूची संबंधित क्रय केन्द्रों से मांगी जा रही है। सूची शासन स्तर पर भेजी जाएगी और उसके बाद खरीदी की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायत में दोषी पाए जाने वाले केन्द्र प्रभारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।]
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ऐसे भ्रष्टाचार में लिप्त केन्द्र प्रभारियों के खिलाफ वास्तव में सख्त कार्रवाई होती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है। किसानों का कहना है कि यदि समय पर जांच और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो उनका भरोसा सहकारी समितियों और शासन व्यवस्था पर कमजोर होगा।