बुद्ध की धरती से दुनिया तक! यूपी की यह चीज अब सिंगापुर में मचाएगी धूम, जानिए कैसे बदली किस्मत

सिद्धार्थनगर का प्रसिद्ध कालानमक चावल पहली बार 1000 टन की रिकॉर्ड मात्रा में सिंगापुर निर्यात किया जाएगा। इस ऐतिहासिक समझौते से हजारों किसानों को बेहतर बाजार और अधिक आय मिलने की उम्मीद है। सरकार, एफपीओ और निर्यातकों की संयुक्त पहल से कालानमक चावल को वैश्विक पहचान मिल रही है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 31 May 2026, 3:42 PM IST

Siddharthnagar: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर से एक ऐसी खबर सामने आई है जो न केवल जिले बल्कि पूरे पूर्वांचल के किसानों के लिए गर्व का विषय बन गई है। बुद्ध की धरती की पहचान बन चुका कालानमक चावल अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई उड़ान भरने जा रहा है। अपनी अनूठी सुगंध, बेहतरीन स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए मशहूर कालानमक चावल की पहली बार एक हजार टन की रिकॉर्ड खेप सिंगापुर भेजी जाएगी। यह उपलब्धि कृषि क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

अब तक सिंगापुर सहित अन्य देशों में कालानमक चावल का निर्यात सीमित मात्रा में ही हो पाता था। अधिकतम 50 टन तक की खेप विदेश भेजी गई थी, लेकिन इस बार 1000 टन निर्यात की तैयारी ने किसानों, कृषि विशेषज्ञों और निर्यातकों में उत्साह भर दिया है। माना जा रहा है कि इससे कालानमक चावल को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिलेगी और हजारों किसानों की आमदनी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

सिंगापुर की संस्था से हुआ बड़ा समझौता

इस ऐतिहासिक निर्यात के लिए सिद्धार्थनगर के मधुवापार स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर के संचालक अभिषेक सिंह और सिंगापुर की संस्था जेन बुद्धा के बीच सहमति बन चुकी है। समझौते के अनुसार 20 दिसंबर 2026 से 15 जनवरी 2027 के बीच चरणबद्ध तरीके से एक हजार टन कालानमक चावल सिंगापुर भेजा जाएगा।

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ओडीओपी योजना से मिली नई पहचान

कालानमक चावल को "एक जिला एक उत्पाद" (ODOP) योजना में शामिल किए जाने के बाद इसके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन को नई गति मिली है। सरकार की पहल और किसानों की मेहनत ने इस पारंपरिक धान की किस्म को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाई है। कालानमक चावल की खासियत इसकी प्राकृतिक खुशबू, स्वाद और पोषण मूल्य हैं। यही वजह है कि इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

प्रधानमंत्री ने भी बढ़ाया कालानमक का गौरव

कालानमक चावल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में केंद्र और राज्य सरकार की पहल भी अहम रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली दौरे के दौरान खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के महानिदेशक को सिद्धार्थनगर का कालानमक चावल भेंट किया था। इस कदम को कालानमक की वैश्विक ब्रांडिंग के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना गया।

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किसानों को मिलेगा बेहतर दाम

कॉमन फैसिलिटी सेंटर के संचालक अभिषेक सिंह ने बताया कि किसानों से कालानमक धान की खरीद 50 से 75 रुपये प्रति किलो की दर से की जाएगी। यह सामान्य धान की तुलना में कहीं बेहतर मूल्य है। उन्होंने बताया कि जो किसान चार टन या उससे अधिक कालानमक धान उपलब्ध कराएंगे, उनके घर से ही सीधे खरीद की व्यवस्था की जाएगी। इससे किसानों को परिवहन, मजदूरी और कुटाई पर होने वाले अतिरिक्त खर्च से राहत मिलेगी।

बड़ी कंपनियों की बढ़ी दिलचस्पी

कालानमक चावल की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई प्रतिष्ठित कंपनियां जिले में खरीदारी कर रही हैं। कुशीनगर की प्रविधान कंपनी, टू ब्रदर्स और इंडिया गेट बासमती जैसी बड़ी कंपनियां किसानों से सीधे संपर्क कर रही हैं। वर्तमान समय में 20 से अधिक कंपनियां जिले में कालानमक धान और चावल की खरीद के लिए काम कर रही हैं। इससे किसानों को बेहतर बाजार और प्रतिस्पर्धी कीमतें मिलने लगी हैं।

Location :  Siddharthnagar

Published :  31 May 2026, 3:42 PM IST