यूपी विधानसभा चुनाव 2027 लड़ने के लिए मौत के 20 साल बाद जिंदा हुआ शख्स, पीएम मोदी के गढ़ वाराणसी में BJP से लेगा टक्कर

सरकारी रिकॉर्ड में करीब 20 साल से मृत दर्ज संतोष मूरत सिंह अब वाराणसी की शिवपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे। आजाद अधिकार सेना ने उन्हें 2027 विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी बनाया है। जानिए उनकी पूरी कहानी और ‘मैं जिंदा हूं’ वाली तख्ती के पीछे का संघर्ष।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 12 August 2026, 5:16 PM IST

Varanasi: सरकारी कागजों में जिस शख्स को करीब 20 साल पहले ‘मृत’ घोषित कर दिया गया, वही अब चुनावी मैदान में उतरकर व्यवस्था को चुनौती देने जा रहा है। वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट से आजाद अधिकार सेना ने संतोष मूरत सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। संतोष की कहानी इसलिए भी चौंकाने वाली है, क्योंकि वह खुद को जिंदा साबित करने के लिए करीब दो दशक से सरकारी दफ्तरों, अदालतों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। अब उन्होंने अपनी इसी लड़ाई को सियासी मंच देने का फैसला किया है।

शिवपुर से प्रत्याशी बने संतोष मूरत

आजाद अधिकार सेना के मुताबिक संतोष मूरत सिंह का मामला सरकारी व्यवस्था और भ्रष्टाचार की उस तस्वीर को सामने लाता है, जिसमें एक जीवित व्यक्ति सरकारी रिकॉर्ड में मृत दर्ज हो गया। पार्टी का कहना है कि संतोष लंबे समय से संवैधानिक और कानूनी रास्तों के जरिए रिकॉर्ड में खुद को जीवित दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं। इसी संघर्ष और उनकी पीड़ा को आवाज देने के लिए पार्टी ने उन्हें शिवपुर से उम्मीदवार बनाया है।

नाना पाटेकर के यहां काम करने का दावा

संतोष मूरत सिंह का कहना है कि वह मुंबई में अभिनेता नाना पाटेकर के यहां काम करते थे। इसी दौरान उन्हें सरकारी दस्तावेजों में मृत घोषित कर दिया गया। उनका आरोप है कि उनकी गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर रिश्तेदारों ने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया। इसके बाद शुरू हुई उनकी लड़ाई आज तक खत्म नहीं हुई है। संतोष के मुताबिक वह लखनऊ, दिल्ली समेत देश के कई शहरों में अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं के सामने अपनी शिकायत रख चुके हैं।

गले में तख्ती, लिखा- ‘मैं जिंदा हूं’

वाराणसी कचहरी के आसपास संतोष अक्सर गले में एक तख्ती लटकाए नजर आते हैं। इस पर साफ शब्दों में लिखा होता है- ‘मैं जिंदा हूं।’ यही तख्ती अब उनकी पहचान बन चुकी है। संतोष का दावा है कि कई बार अधिकारियों और बड़े नेताओं की तरफ से उन्हें सरकारी रिकॉर्ड में दोबारा जीवित दर्ज कराने का भरोसा मिला, लेकिन करीब दो दशक बाद भी कागजों में उनकी स्थिति नहीं बदली।

अब सियासत के जरिए लड़ेंगे लड़ाई

संतोष पहले भी चुनाव लड़ने की इच्छा जता चुके हैं। अब पार्टी की ओर से आधिकारिक उम्मीदवारी मिलने के बाद उनकी लड़ाई सीधे चुनावी मैदान में पहुंच गई है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले उनकी उम्मीदवारी ने वाराणसी की राजनीति में एक अलग तरह की चर्चा छेड़ दी है। सरकारी रिकॉर्ड में ‘मृत’ घोषित किए गए लोगों की समस्या पर पहले भी बहस होती रही है और इसी तरह की वास्तविक घटनाओं से प्रेरित कहानियां फिल्मी पर्दे पर भी दिखाई जा चुकी हैं।

Location :  Varanasi

Published :  12 August 2026, 5:13 PM IST