मुरादाबाद के अस्पताल में हुआ ऐसा चमत्कार, जिसे सुनकर लोग पूछ रहे-क्या ये सच है?

मुरादाबाद के TMU अस्पताल में हुआ एक मामला अब हर तरफ चर्चा का विषय बना हुआ है। संभल की एक महिला ने महज पांच दिनों के भीतर चार बच्चों को जन्म दिया और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पूरा मामला सामान्य डिलीवरी से जुड़ा है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 May 2026, 12:13 PM IST

Moradabad: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद स्थित तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (TMU) अस्पताल से सामने आया एक अनोखा मामला इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। संभल जिले की रहने वाली 31 वर्षीय अमीना ने पांच दिनों के भीतर चार बच्चों को जन्म दिया। सबसे खास बात यह रही कि इतने जटिल मामले में भी डॉक्टरों ने सामान्य डिलीवरी कराई, जिसे मेडिकल क्षेत्र में बेहद दुर्लभ माना जा रहा है।

अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक अमीना और उनके चारों बच्चे फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में हैं। मां की हालत स्थिर बताई जा रही है, जबकि नवजात बच्चों को विशेष देखरेख में रखा गया है।

शुरुआत से ही हाई-रिस्क थी प्रेग्नेंसी

संभल जिले के असमोली क्षेत्र की रहने वाली अमीना की गर्भावस्था शुरुआत से ही डॉक्टरों के लिए चुनौती बनी हुई थी। शुरुआती जांच और अल्ट्रासाउंड में पता चला कि महिला के गर्भ में चार शिशु पल रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार यह मामला इसलिए भी जटिल था क्योंकि गर्भ में पल रहे सभी बच्चे अलग-अलग थैली यानी अलग सैक में थे। ऐसी स्थिति में गर्भावस्था के दौरान मां और बच्चों दोनों को गंभीर खतरा हो सकता था।

बताया गया कि अमीना को हाई ब्लड प्रेशर और लीवर संबंधी समस्याएं भी थीं। इसी वजह से उन्हें कई बार अस्पताल में भर्ती कर लगातार निगरानी में रखा गया।

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डॉक्टरों ने दी थी फीटल रिडक्शन की सलाह

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने परिवार को “फीटल रिडक्शन” की सलाह दी थी। यह ऐसी प्रक्रिया होती है जिसमें जोखिम कम करने के लिए गर्भ में पल रहे कुछ भ्रूणों को हटाया जाता है ताकि बाकी बच्चों और मां की जान सुरक्षित रह सके। हालांकि परिवार ने चारों बच्चों को जन्म देने का फैसला किया। इसके बाद डॉक्टरों ने पूरी गर्भावस्था के दौरान बेहद सावधानी के साथ इलाज और मॉनिटरिंग जारी रखी।

9 मई को हुआ पहला जन्म

अस्पताल प्रशासन के अनुसार 8 मई को अमीना को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। इसके बाद 9 मई को उन्होंने पहले बेटे को जन्म दिया। बच्चे का वजन करीब 710 ग्राम बताया गया। चूंकि गर्भावस्था केवल साढ़े छह से सात महीने की थी, इसलिए डॉक्टरों ने बाकी बच्चों की डिलीवरी तुरंत नहीं कराई। मेडिकल टीम ने सूझबूझ दिखाते हुए अन्य बच्चों को कुछ और समय तक गर्भ में सुरक्षित रखने की कोशिश की ताकि उनका विकास बेहतर हो सके।

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14 मई को जन्मे बाकी तीन बच्चे

करीब पांच दिन बाद 14 मई को अमीना को फिर प्रसव पीड़ा हुई। इसके बाद डॉक्टरों ने बाकी तीन बच्चों की डिलीवरी कराई। इनमें एक बेटा और दो बेटियां शामिल हैं। डॉक्टरों के मुताबिक जन्म के बाद एक बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है, जबकि बाकी बच्चों को उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए विशेष मेडिकल केयर यूनिट में रखा गया है।

डॉक्टरों के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहा केस

अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि यह केस मेडिकल साइंस में बेहद दुर्लभ माना जाता है। सामान्य तौर पर ऐसे मामलों में सिजेरियन ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है, लेकिन यहां सभी बच्चों की नॉर्मल डिलीवरी कराना बड़ी चुनौती थी। इस पूरे मामले में डॉ. शुभ्रा अग्रवाल, डॉ. पूर्ति, डॉ. रोली और डॉ. मोनिका समेत पूरी मेडिकल टीम लगातार सक्रिय रही। डॉक्टरों का कहना है कि सही समय पर उपचार और लगातार मॉनिटरिंग की वजह से मां और बच्चों को सुरक्षित रखा जा सका।

परिवार ने जताई खुशी

चार बच्चों के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। बच्चों के पिता मोहम्मद आलिम, जो गांव में किराना दुकान चलाते हैं, उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ का आभार जताया। परिजनों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान अस्पताल ने हर कदम पर सहयोग किया। वहीं अस्पताल प्रशासन ने इसे अपनी मेडिकल टीम की बड़ी उपलब्धि बताया है।

Location :  Moradabad

Published :  16 May 2026, 12:13 PM IST