सहारनपुर में सफाई व्यवस्था पर संकट! प्राइवेट कंपनी के विरोध में कर्मचारियों ने दी हड़ताल की चेतावनी

सहारनपुर में नगर निगम की एक तैयारी अब शहर की सफाई व्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकती है। सफाई कर्मचारी और सुपरवाइजर निजी कंपनी के खिलाफ खुलकर मैदान में उतर आए हैं। कर्मचारियों ने शोषण और बड़े आर्थिक खेल के आरोप लगाते हुए उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 12 May 2026, 3:39 PM IST

Saharanpur: सहारनपुर नगर निगम में सफाई व्यवस्था को निजी कंपनी को सौंपने की तैयारी के विरोध में सफाई कर्मचारी अब आंदोलन के मूड में आ गए हैं। मंगलवार को उत्तर प्रदेशीय सफाई मजदूर संघ, अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस और उत्तर प्रदेश स्थानीय निकाय संयुक्त सफाई कर्मचारी संघ के नेतृत्व में पुरानी मंडी क्षेत्र स्थित आली की चुंगी पर आउटसोर्सिंग सफाई कर्मचारियों की बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक में कर्मचारियों और सुपरवाइजरों ने नगर निगम प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए सांकेतिक आंदोलन की शुरुआत कर दी। कर्मचारियों ने साफ कहा कि अगर निजी कंपनी को सफाई व्यवस्था सौंपी गई तो शहरभर में हड़ताल की जाएगी।

“निजी कंपनियां करती हैं शोषण”

बैठक में मौजूद वाल्मीकि समाज के जिला अध्यक्ष विनोद घावरी और संघ नेताओं ब्रजमोहन चिनालिया, रघुवीर चंदेल, मनमोहन सूद, अम्बर चंदेल, चेतन चणियाणे और अविनाश बिरला ने आरोप लगाया कि निजी कंपनियां अपने फायदे के लिए सफाई कर्मचारियों का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण करती हैं।

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नेताओं ने कहा कि पहले भी नगर निगम ने सफाई व्यवस्था निजी हाथों में दी थी, लेकिन वह व्यवस्था सफल नहीं हो पाई थी। उनका दावा है कि वर्तमान में शहरी आजीविका केंद्र के माध्यम से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों द्वारा सफाई कार्य कराया जा रहा है और व्यवस्था संतोषजनक तरीके से चल रही है।

75 करोड़ रुपये के ठेके पर उठे सवाल

संघ नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम प्रशासन करीब 75 करोड़ रुपये सालाना खर्च कर निजी कंपनी को सफाई का ठेका देने जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि सफाई कार्य में इस्तेमाल होने वाले वाहन और अन्य संसाधन नगर निगम के ही रहेंगे, फिर भी भारी रकम निजी कंपनी को दी जा रही है।

कर्मचारियों ने इस फैसले को गलत बताते हुए कहा कि इससे निगम पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कर्मचारियों का भविष्य भी खतरे में पड़ जाएगा।

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मांग पत्र के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

संगठनों का कहना है कि 6 मई 2026 को नगर निगम प्रशासन को इस मामले में मांग पत्र सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी कारण कर्मचारियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। बैठक में मौजूद कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि वाल्मीकि समाज और सफाई कर्मचारियों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

Location :  Saharanpur

Published :  12 May 2026, 3:39 PM IST