सहारनपुर में आशाओं का 13वें दिन भी धरना, 30 हजार मानदेय की मांग पर अड़ीं कार्यकर्ता

सहारनपुर में आशा कार्यकर्ताओं का धरना 13वें दिन भी जारी है। 30 हजार रुपये मासिक मानदेय की मांग को लेकर सैकड़ों आशाएं 22 अक्टूबर को लखनऊ कूच करेंगी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 October 2026, 3:51 PM IST

Saharanpur: मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का धरना जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय पर 13वें दिन भी जारी रहा। छुट्टी के दिन भी बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। आशाओं ने न्यूनतम 30 हजार रुपये मासिक मानदेय देने की मांग उठाते हुए चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

22 अक्टूबर को लखनऊ कूच करेंगी सैकड़ों आशाएं

आशा कार्यकर्ताओं ने घोषणा की कि 22 अक्टूबर को शाम चार बजे तीन से चार बसों में सवार होकर सैकड़ों आशाएं लखनऊ के लिए कूच करेंगी। उनका कहना है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल भी शुरू की जाएगी।

यह भी पढ़ें: Neha Bora vs Delhi Police: पीस बॉन्ड नोटिस को लेकर हाई कोर्ट पहुंचीं AISA अध्यक्ष

24 घंटे काम, फिर भी नहीं मिल रहा उचित मानदेय

धरने पर बैठी आशाओं ने कहा कि उनसे दिन-रात काम लिया जाता है। देर रात भी उन्हें गर्भवती महिलाओं को लेकर जिला अस्पताल पहुंचना पड़ता है। इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न योजनाओं और अन्य जिम्मेदारियों का निर्वहन भी करना पड़ता है। इसके बावजूद उन्हें कथित तौर पर 2,000 से 1,500 रुपये के बीच मानदेय मिलता है, जो समय पर भी नहीं दिया जाता। ऐसे में परिवार का पालन-पोषण करना मुश्किल हो रहा है।

नेताओं और अधिकारियों पर अनदेखी का आरोप

आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार महिला सशक्तीकरण की बात करती है, लेकिन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि धरने के दौरान अब तक न तो सत्ताधारी दल का कोई नेता और न ही विपक्ष का कोई प्रमुख नेता उनकी समस्याएं सुनने पहुंचा है। उन्होंने अधिकारियों पर भी उनकी मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।

यह भी पढ़ें: शिवा हत्याकांड: श्रद्धा दुबे केस में एक और एक्शन, इंस्पेक्टर और DCP के बाद ACP रजनीश वर्मा हटाए गए, नोएडा से है लिंक

मांग पूरी नहीं हुई तो बढ़ेगा आंदोलन

प्रदर्शन में शामिल कुछ आशाओं ने आर्थिक तंगी से परेशान होकर आत्महत्या तक करने की चेतावनी दी। वहीं, कई आशा कार्यकर्ताओं ने आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में सरकार को वोट नहीं देने की बात कही। आशाओं ने साफ किया कि जब तक उनका मासिक मानदेय 30 हजार रुपये नहीं किया जाता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी। अब देखना होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या कदम उठाती है।

Location :  Saharanpur

Published :  19 October 2026, 3:51 PM IST