राम मंदिर चंदा चोरी: कम वेतन वाले कर्मचारियों के पास करोड़ों की संपत्ति कैसे? जांच के घेरे में ट्रस्ट, बैंक और आउटसोर्सिंग कंपनी

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन मामले की जांच तेज हो गई है। 12 से 18 हजार रुपये वेतन पाने वाले कुछ कर्मचारियों के पास नकदी और संपत्ति के दस्तावेज मिलने के बाद बैंक, आउटसोर्सिंग कंपनी और ट्रस्ट की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 June 2026, 9:51 AM IST

Ayodhya: अयोध्या के राम मंदिर में दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे की राशि में कथित करोड़ों रुपये के गबन का मामला अब नए और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। मामले की जांच कर रही एसआईटी ने अपनी पड़ताल तेज कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जांच अब केवल संदिग्ध कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि चढ़ावे की गिनती की पूरी व्यवस्था और उससे जुड़े विभिन्न पक्षों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर उठे सवाल

जांच में सामने आया है कि चढ़ावे की गिनती के लिए बैंक ने एक आउटसोर्सिंग कंपनी के माध्यम से कर्मचारियों की तैनाती की थी। हालांकि, इन कर्मचारियों के चयन में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की भूमिका भी बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करोड़ों रुपये के नकद चढ़ावे की गिनती जैसे अत्यंत संवेदनशील कार्य में लगाए गए कई कर्मचारी किसी प्रभावशाली पदाधिकारी के परिचित या उनसे जुड़े नेटवर्क का हिस्सा बताए जा रहे हैं।

इसी बिंदु को लेकर अब जांच एजेंसियां नियुक्ति प्रक्रिया और चयन के मानकों की भी पड़ताल कर रही हैं।

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पुलिस सत्यापन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न

मामले में सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। बताया जा रहा है कि चढ़ावे की गिनती करने वाले कर्मचारियों का न तो समुचित पुलिस सत्यापन कराया गया और न ही उनकी नियमित तलाशी की कोई प्रभावी व्यवस्था थी।

ट्रस्ट का कर्मचारी पहचान पत्र होने के कारण ये कर्मचारी मंदिर परिसर में आसानी से आवाजाही करते थे। जबकि मंदिर की सुरक्षा में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों की तैनाती है, इसके बावजूद ट्रस्ट कर्मचारियों की गतिविधियों पर अपेक्षित स्तर की निगरानी नहीं होने के आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसियां अब यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में ऐसी चूक कैसे हुई।

12 से 18 हजार वेतन, फिर लाखों-करोड़ों की संपत्ति कैसे?

जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू संदिग्ध कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को लेकर सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन कर्मचारियों के पास से नकद धनराशि और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए हैं, वे महज 12 से 18 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर कार्यरत थे।

बताया जा रहा है कि ये कर्मचारी दिन-रात मंदिर परिसर में ही रहते थे। ऐसे में जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि सीमित आय वाले इन कर्मचारियों के पास बड़ी मात्रा में नकदी, अचल संपत्ति और अन्य निवेश के स्रोत क्या थे। इसी सवाल ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है।

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बेहिसाब नकदी बनी जांच की सबसे बड़ी चुनौती

सूत्रों के अनुसार, मंदिर के दानपात्रों में आने वाली नकद राशि का सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान ही अनियमितताओं का खेल हुआ और जो रकम आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुई, वह पूरी तरह हिसाब-किताब से बाहर रह गई।

यही कारण है कि कथित गबन की वास्तविक राशि कितनी है, इसका सटीक आकलन करना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। एसआईटी अब बैंक, आउटसोर्सिंग कंपनी और ट्रस्ट से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।

Location :  Ayodhya

Published :  17 June 2026, 9:51 AM IST