अयोध्या राम मंदिर निर्माण में 800 करोड़ का बजट सीधे 2200 करोड़ पार, महिपाल सिंह के खुलासे से मचा बवाल

राम मंदिर निर्माण के 800 करोड़ के अनुमानित बजट के 2200 करोड़ रुपये तक पहुंचने और चढ़ावा चोरी के गंभीर मामलों पर पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने एसआईटी को ठोस साक्ष्य सौंपे हैं। ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और खरीद पर उठे कई बड़े सवाल।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 4 August 2026, 8:34 AM IST

Ayodhya: अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण को लेकर एक नया और सनसनीखेज वित्तीय विवाद सामने आया है। मंदिर निर्माण का शुरुआती अनुमान जहां महज 800 करोड़ रुपये था, वहीं यह आंकड़ा बढ़कर अब सीधे 2200 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। इस भारी-भरकम अंतर और मंदिर के चढ़ावे में चोरी के गंभीर मामलों को लेकर राम मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) को ठोस साक्ष्य सौंप दिए हैं।

एसआईटी की कार्रवाई और ईमेल के जरिए बयान

बीते 26 जुलाई को एसआईटी के अध्यक्ष एवं लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह को आधिकारिक ई-मेल भेजा था। इस ई-मेल के माध्यम से उन्हें अपने सभी आरोपों के समर्थन में पुख्ता सबूत पेश करने का औपचारिक अवसर दिया गया था। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया था कि जरूरत पड़ने पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनका बयान भी दर्ज किया जाएगा। गौरतलब है कि महिपाल सिंह ने गत नौ जून को कई बड़े खुलासे करते हुए प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए थे।

Ayodhya Ram Mandir: आज ट्रस्ट की अहम बैठक में क्या होगा बड़ा फैसला? नए महासचिव से लेकर नई व्यवस्थाओं तक कई राज खुलने के आसार

चढ़ावा चोरी और नोटों की हेराफेरी का गंभीर आरोप

महिपाल सिंह का दावा है कि उन्होंने वर्ष 2021 में ही मंदिर में चल रही चढ़ावा चोरी को पकड़ लिया था। उनके अनुसार, रामशंकर यादव टिन्नू के संरक्षण में बैंककर्मी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप नोटों की अधिक गड्डियां छिपाकर चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे। जब इस पूरे मामले की जानकारी तत्कालीन महासचिव चंपत राय को दी गई, तो उन्होंने इस पर कार्रवाई करने के बजाय मामले को शांत रहने की हिदायत दी। महिपाल का आरोप है कि इसके अगले ही दिन डॉ अनिल मिश्र के निर्देश पर उन्हें उनके पद से हटा दिया गया और उनकी जगह सुभाष श्रीवास्तव की ड्यूटी लगा दी गई, जो वर्तमान में पुलिस की गिरफ्त में हैं।

निर्माण कार्यों में तकनीकी खामियां और वित्तीय गड़बड़ियां

पूर्व लेखा प्रभारी ने एसआईटी को दी गई जानकारी में निर्माण कार्य से जुड़ी कई अन्य अनियमितताओं का भी पर्दाफाश किया है। उनके मुताबिक-

  • ट्रस्ट ने सिविल इंजीनियरिंग का अनुभव न रखने वाले इलेक्ट्रिक इंजीनियर जगदीश आफले को प्रोजेक्ट इंजीनियर नियुक्त किया, जिसकी वजह से मंदिर का निर्माण कार्य तय वास्तु के अनुरूप नहीं हो सका।
  • नियमों को ताक पर रखकर निशुल्क मिलने वाले बंशी पहाड़पुर के पत्थरों को नजरअंदाज किया गया और इसके बजाय अधोमानक गुणवत्ता वाले पत्थरों की खरीद की गई।
  • वित्तीय प्रबंधन संभालने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय पर निर्माण कंपनियों के बिल रोककर उन्हें परेशान करने और नियमों के विरुद्ध अधिक भुगतान कराने के आरोप हैं।
  • कैशियर वीरेंद्र वर्मा द्वारा कई ऐसे फर्जी लोगों के नाम भुगतान जारी किए गए, जिन्होंने धरातल पर कोई कार्य किया ही नहीं था।

Ayodhya: राम मंदिर दान पेटिका मामले में फिर पहुंची SIT, पुजारियों और ट्रस्ट पदाधिकारियों से होगी पूछताछ

विवादित संपत्तियों की खरीद और नया वित्तीय प्रबंधन

जांच के दायरे में आए अन्य बिंदुओं के अनुसार, ट्रस्ट ने कई ऐसे अनधिकृत लोगों से विवादास्पद संपत्तियां खरीदीं जिनका आज तक कब्जा नहीं मिल पाया है। इन संपत्तियों पर न्यायालय में वाद दायर होने के कारण ट्रस्ट का धन व्यर्थ खर्च हो रहा है। इसके अलावा, जिन चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय की भूमिका पर चोरी उजागर होने के बाद से लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं, उन्हीं को ट्रस्ट ने अब बैंक खातों के संचालन के लिए फिर से अधिकृत कर दिया है। वर्तमान में उनके साथ अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन और इंजीनियर जगदीश आफले के संयुक्त हस्ताक्षर से गिनती के बाद धनराशि बैंक खातों में जमा की जा रही है।

Location :  Ayodhya

Published :  4 August 2026, 8:34 AM IST