रायबरेली में राज्य मंत्री दिनेश सिंह ने राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी के कथित ड्राइविंग लाइसेंस पर सवाल उठाकर सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने लाइसेंस की वैधता, उसके स्रोत और सार्वजनिक किए जाने के उद्देश्य पर जांच की मांग की।

राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश सिंह
Raebareli: रायबरेली की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार दिनेश सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दादा फिरोज गांधी के कथित ड्राइविंग लाइसेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने न सिर्फ इस लाइसेंस की वैधता पर संदेह जताया, बल्कि यह भी मांग की कि इसकी पूरी जांच होनी चाहिए कि यह दस्तावेज आखिर किस तरह और कहां से सामने आया।
दिनेश सिंह ने कहा कि यह ड्राइविंग लाइसेंस रायबरेली निवासी विकास सिंह द्वारा उन्हें सौंपा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई निजी दस्तावेज, वह भी लगभग 80 वर्ष पुराना, किसी आम व्यक्ति के पास कैसे पहुंच सकता है। अगर फिरोज गांधी का लाइसेंस था, तो वह या तो उनके परिवार के पास होना चाहिए था या फिर राहुल गांधी के घर में, न कि किसी तीसरे व्यक्ति के पास।
राज्य मंत्री ने यह भी आशंका जताई कि कहीं राहुल गांधी अपनी रायबरेली यात्रा को चर्चित बनाने के उद्देश्य से यह लाइसेंस अपने साथ लेकर तो नहीं आए थे। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में यह भी जांच होनी चाहिए कि लाइसेंस को सार्वजनिक करने के पीछे मंशा क्या थी।
दिनेश सिंह ने दो दिन पहले राहुल गांधी द्वारा मनरेगा को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देने के लिए पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि मनरेगा से पहले भी इस योजना के अलग-अलग नाम रहे हैं और वर्तमान सरकार ने इसमें कई सुधार किए हैं। उन्होंने राहुल गांधी के इस आरोप को भी खारिज किया कि मोदी सरकार गरीबों के अधिकार छीन रही है। मंत्री ने कहा कि जीबीबीजी राम जी योजना संशोधन के बाद और अधिक मजबूत हुई है, लेकिन राहुल गांधी को इसकी सही जानकारी नहीं है।
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राहुल गांधी द्वारा बार-बार अडानी और अंबानी का नाम लिए जाने पर भी दिनेश सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी आज की राजनीति में दिशा विहीन हो चुके हैं और हताशा में ऐसे बयान दे रहे हैं।
दिनेश सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और उनकी टीम ने फिरोज गांधी के नाम का इस्तेमाल सिर्फ प्रचार के लिए किया है। उन्होंने कहा कि जिस गांधी परिवार ने कभी फिरोज गांधी को उचित सम्मान नहीं दिया, वही आज राजनीतिक लाभ के लिए उनका नाम उछाल रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर लाइसेंस वास्तविक भी था, तो इतने वर्षों तक उसे लौटाया क्यों नहीं गया। ड्राइविंग लाइसेंस व्यक्ति की निजी संपत्ति होता है और उसे सुरक्षित रखना या लौटाना नैतिक जिम्मेदारी होती है।