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प्रयागराज नगर निगम में महाकुंभ के नाम पर बड़ा घोटाला (img: pinterest)
Prayagraj: प्रयागराज नगर निगम के बिजली विभाग में वित्तीय गड़बड़ी और सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद प्रशासन ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। आरोप है कि महाकुंभ की तैयारियों के दौरान UPPCL ने एक खास तरह की लाइट लगभग 2,600 में खरीदी थी, जबकि नगर निगम के बिजली विभाग ने उसी तरह की लाइट लगभग 12,500 की दर से खरीदी। इस मामले में नगर निगम के चीफ इंजीनियर संजय कटियार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
पार्षद कमलेश तिवारी की शिकायत के बाद इस मामले की जांच शुरू की गई। शिकायत में लाइट की खरीद में सरकारी फंड के इस्तेमाल और वित्तीय गड़बड़ी को लेकर सवाल उठाए गए थे। आरोप है कि जांच के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अब नगर निगम के बिजली विभाग से जुड़े पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। इस व्यापक जांच की जिम्मेदारी एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर दीपेंद्र यादव को सौंपी गई है। जांच में खरीद प्रक्रिया, मंजूर बजट, किए गए भुगतान और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी।
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शिकायत का सबसे अहम पहलू लाइट की खरीद कीमत से जुड़ा है। आरोप है कि महाकुंभ की तैयारियों के दौरान UPPCL ने लाइटें लगभग 2,600 प्रति यूनिट के हिसाब से खरीदी थीं, जबकि नगर निगम के बिजली विभाग ने उसी तरह की लाइट के लिए लगभग 12,500 का भुगतान किया। अगर जांच में कीमत में इस अंतर और खरीद नियमों की अनदेखी की पुष्टि होती है, तो सरकारी फंड के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, पूरी तस्वीर तभी साफ होगी जब जांच पूरी हो जाएगी और संबंधित दस्तावेजों की पुष्टि हो जाएगी।
प्रशासन ने प्रयागराज में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी विकास कार्यों में लापरवाही को लेकर पहले ही सख्त रुख अपनाया हुआ है। जिला मजिस्ट्रेट मनीष कुमार वर्मा ने बिजली विभाग के 11 एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों की सैलरी रोकने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है। उन पर जनता की शिकायतों का समय पर और असरदार ढंग से समाधान न करने का आरोप है।
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नगर निगम के बिजली विभाग में कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच अब एडिशनल म्युनिसिपल कमिश्नर की देखरेख में की जाएगी। इस जांच में कई पहलुओं की पड़ताल होगी जैसे स्ट्रीटलाइट की खरीद और रखरखाव, बजट का इस्तेमाल, किए गए भुगतान और संबंधित अधिकारियों की भूमिका। नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं और अगर गड़बड़ी साबित होती है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है इसका फैसला जांच रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही किया जाएगा।
Location : Prayagraj
Published : 5 October 2026, 2:00 PM IST