बड़ी खबर: प्रयागराज माघ मेला प्रशासन शंकराचार्य से माफी मांगने के लिए तैयार, जानें क्या हैं अविमुक्तेश्वरानंद की दो शर्तें

प्रयागराज माघ मेला विवाद में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से प्रशासन माफी मांगने को तैयार बताया जा रहा है। मीडिया प्रभारी के अनुसार प्रशासन ने संपर्क साधा, लेकिन शंकराचार्य ने लिखित माफी और चारों शंकराचार्यों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय करने की दो शर्तें रखी हैं।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 30 January 2026, 9:33 AM IST

Prayagraj: प्रयागराज माघ मेला से जुड़े विवाद में अब बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़ा मामला तूल पकड़ने के बाद अब प्रयागराज प्रशासन माफी मांगने को तैयार बताया जा रहा है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार ने दावा किया है कि प्रशासन ने संवाद की पहल की है और सम्मानपूर्वक समाधान की इच्छा जताई है।

वाराणसी में हुआ संपर्क

शंकराचार्य के वाराणसी पहुंचने के बाद लखनऊ से आए दो वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया। अधिकारियों ने आग्रह किया कि पूर्णिमा के अवसर पर उन्हें ससम्मान प्रयागराज लाया जाए और विधिवत स्नान कराया जाए। प्रशासन की इस पहल को विवाद सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शंकराचार्य की दो स्पष्ट शर्तें

हालांकि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले दो स्पष्ट शर्तें रखीं।

पहली शर्त यह है कि पूरे घटनाक्रम के लिए जिम्मेदार अधिकारी लिखित रूप में सार्वजनिक माफी मांगें।

दूसरी शर्त के तहत चारों शंकराचार्यों के लिए माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ जैसे आयोजनों में स्पष्ट और घोषित प्रोटोकॉल तय किया जाए।

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प्रोटोकॉल को लेकर उठे सवाल

शंकराचार्य पक्ष का कहना है कि धार्मिक परंपराओं और पद की गरिमा को लेकर स्पष्ट दिशानिर्देश न होने से ऐसे विवाद बार-बार सामने आते हैं। अगर एक समान प्रोटोकॉल तय कर दिया जाए, तो भविष्य में न केवल टकराव से बचा जा सकता है, बल्कि प्रशासन और धर्मगुरुओं के बीच समन्वय भी बेहतर होगा।

इसलिए बैकफुट पर आया प्रशासन

सूत्रों के अनुसार शंकराचार्य से जुड़े विवाद को लेकर सरकार पर अंदरूनी और बाहरी दबाव लगातार बढ़ रहा था। संत समाज के साथ-साथ सरकार के भीतर भी असहमति के स्वर सुनाई देने लगे थे। डिप्टी सीएम केशव मौर्य खुलकर शंकराचार्य के समर्थन में सामने आए और उन्होंने यहां तक कहा कि कहने पर वे स्वयं उनसे मिलने जाएंगे।

आम लोगों में भी शंकराचार्य के साथ हुए व्यवहार को लेकर नाराजगी थी। बीते दस दिनों में यह मुद्दा कई बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रेंड हुआ। बढ़ते दबाव को देखते हुए सरकार ने पर्दे के पीछे रुख नरम किया और लखनऊ में वरिष्ठ अधिकारियों को स्थिति संभालने की जिम्मेदारी दी। सरकार स्नान कार्यक्रम के जरिए विवाद को शांत करना चाहती है, ताकि मामला और न बढ़े।

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आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन शंकराचार्य की शर्तों पर किस हद तक सहमत होता है। अगर लिखित माफी और प्रोटोकॉल की घोषणा होती है, तो यह मामला शांत हो सकता है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच संवाद जारी है और किसी औपचारिक निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 30 January 2026, 9:33 AM IST