Prateek Yadav Death: आखिर क्या थी वह गंभीर बीमारी, जिसने 38 साल में छीन ली प्रतीक यादव की जिंदगी?

समाजवादी पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव का लखनऊ में 38 साल की उम्र में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह लंबे समय से फेफड़ों में ब्लड क्लॉट यानी पल्मोनरी एम्बोलिज्म की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। जानिये ये कितना खतरनाक?

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 13 May 2026, 1:05 PM IST

Prateek Yadav Death Reason: समाजवादी पार्टी के संस्थापक Mulayam Singh Yadav के बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav के सौतेले भाई Prateek Yadav का बुधवार 13 मई 2026 को लखनऊ में निधन हो गया। वह 38 वर्ष के थे। परिवार के सदस्य उन्हें सुबह करीब 6:15 बजे सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उस समय उनकी पत्नी और भाजपा नेता Aparna Yadav अस्पताल में मौजूद नहीं थीं।

लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे प्रतीक

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रतीक यादव लंबे समय से फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। बताया जा रहा है कि उनके लंग्स में खून का थक्का जम गया था और उसका इलाज चल रहा था। बुधवार सुबह अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। उन्होंने प्रतिक्रिया देना बंद कर दिया, जिसके बाद परिवार वाले तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के करीबी और समर्थक इस खबर से स्तब्ध हैं।

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क्या होता है लंग्स में ब्लड क्लॉट?

लंग्स में खून का थक्का जमने की स्थिति को मेडिकल भाषा में "पल्मोनरी एम्बोलिज्म" कहा जाता है। यह एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी मानी जाती है। इस स्थिति में शरीर की नसों में बना खून का थक्का फेफड़ों तक पहुंच जाता है और वहां की धमनियों में रुककर ब्लड फ्लो को बाधित कर देता है।

ज्यादातर मामलों में यह थक्का पैरों की गहरी नसों से निकलकर फेफड़ों तक पहुंचता है। इस स्थिति को "डीप वेन थ्रॉम्बोसिस" यानी DVT कहा जाता है। जब यह थक्का लंग्स की आर्टरीज में फंस जाता है, तब शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह प्रभावित होने लगता है।

मरीज को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ता है?

डॉक्टरों के अनुसार, पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने पर मरीज को अचानक सांस लेने में परेशानी शुरू हो सकती है। इसके अलावा सीने में तेज दर्द, चक्कर आना, घबराहट, बेहोशी और लगातार सांस फूलने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। कई बार मरीज को खांसी के साथ खून भी आ सकता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर समय रहते इलाज न मिले तो फेफड़ों का प्रभावित हिस्सा धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है। इससे शरीर के अन्य अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जो जानलेवा साबित हो सकती है।

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समय पर इलाज से बच सकती है जान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते इलाज मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है। उपचार के दौरान खून के थक्के को बढ़ने से रोकने और नए थक्के बनने से बचाने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

लंबे समय तक बैठे रहने, मोटापा, धूम्रपान, नसों से जुड़ी बीमारी और हार्ट या फेफड़ों की पुरानी बीमारी से पीड़ित लोगों में इस बीमारी का खतरा अधिक माना जाता है। डॉक्टर ऐसे लोगों को नियमित जांच और सतर्कता बरतने की सलाह देते हैं।

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है, इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

Location :  Lucknow

Published :  13 May 2026, 1:03 PM IST