
अखिलेश यादव (Img : pinterest)
Lucknow : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होती दिख रही हैं। चुनाव नजदीक आते ही सभी राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक समीकरण साधने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को समाजवादी चिंतक एवं 'छोटे लोहिया' के नाम से प्रसिद्ध जनेश्वर मिश्र की जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश की। अपने संबोधन में उन्होंने भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का उदाहरण देते हुए सामाजिक सम्मान और साझी विरासत का संदेश दिया।
ब्राह्मण सम्मेलन में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती हजारों साल पुरानी है और भारतीय संस्कृति में इससे बड़ा मित्रता का उदाहरण दूसरा नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी को जब भी अवसर मिला। उसने सभी वर्गों को सम्मान देने का काम किया है।
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अखिलेश यादव ने अपने भाषण में महाकुंभ के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि शंकराचार्य को धरना देना पड़ा। उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। साथ ही उन्होंने कहा कि बटुकों के साथ भी सरकार ने अपमानजनक व्यवहार किया। जिसे लोग भूले नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शंकराचार्य को डराने के लिए उन पर झूठा पॉक्सो मामला दर्ज कराया गया।
सपा प्रमुख ने भाजपा विधायकों की बाटी-चोखा बैठक से जुड़े विवाद को भी उठाया। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर खाने-पीने पर किसी को नोटिस नहीं मिलता, लेकिन विधायकों के बाटी-चोखा खाने पर नोटिस जारी कर दिया गया। उन्होंने कहा कि विरोधियों को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा।
अखिलेश यादव ने यूपी पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा के उस विवादित प्रश्न का भी उल्लेख किया। जिसमें 'अवसरवादी' शब्द के विकल्पों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज के एक वर्ग की भावनाओं को आहत करती हैं ।
Location : Lucknow
Published : 5 August 2026, 7:32 PM IST
Topics : Akhilesh Yadav Jaleshwar Mishra Jayanti Krishna Sudama Samajwadi Party UP Assembly Election 2027