NDPS Case Verdict: ‘न्यायाधीश के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए?’ Justice System पर अहम टिप्पणी

मुजफ्फरनगर फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने एक फैसले में न्याय व्यवस्था से जुड़े कई अहम सवाल उठाए हैं। एनडीपीएस एक्ट के पुराने मामले में आरोपी को बरी करते हुए उन्होंने न्यायाधीशों की भूमिका और प्रशासनिक आदेशों को लेकर टिप्पणी की।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 September 2026, 11:07 AM IST

मुजफ्फरनगर: मुजफ्फरनगर की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-3/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने 10 साल पुराने एनडीपीएस एक्ट मामले में फैसला सुनाते हुए न्याय व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों पर टिप्पणी की है।

अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी अशोक भारत को दोषमुक्त कर दिया। फैसले में न्यायाधीश ने लिखा कि न्यायाधीश का काम न्याय करना होता है, लेकिन अगर उसी के साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए।

जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण पर उठाया सवाल

फैसले में न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने सवाल उठाया कि जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाला न्यायाधीश क्या ऐसे आदेशों को मानने के लिए बाध्य है, जो कानून के विपरीत हों।

उन्होंने प्रशासनिक आदेशों और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन को लेकर अपनी टिप्पणी दर्ज की है।

'तारीख पर तारीख' का किया जिक्र

फैसले में फिल्म 'दामिनी' के चर्चित संवाद 'तारीख पर तारीख' का भी उल्लेख किया गया। न्यायाधीश ने कहा कि एक निर्दोष व्यक्ति को न्याय पाने में लंबा समय लग गया।

अदालत ने कहा कि लंबे समय तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया से आम व्यक्ति को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

97 मुकदमों की पत्रावलियों को लेकर भी टिप्पणी

न्यायाधीश ने अपने फैसले में 18 अगस्त को ट्रांसफर की गई हत्या के मामलों की 97 पत्रावलियों का भी जिक्र किया।

फैसले के अनुसार, तत्कालीन जनपद न्यायाधीश ने नौ अलग-अलग आदेशों के जरिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/एफटीसी कोर्ट संख्या-3 में लंबित इन मामलों को अपने न्यायालय में रिकॉल किया था।

रिटायरमेंट से 13 दिन पहले रिकॉल आदेश का उल्लेख

फैसले में कहा गया कि तत्कालीन जनपद न्यायाधीश ने अपने रिटायरमेंट से करीब 13 दिन पहले इन 97 पत्रावलियों को रिकॉल किया था।

न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि इन मामलों को रिकॉल करने के आदेश में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया था। इसी संदर्भ में उन्होंने प्रशासनिक नियंत्रण और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए।

155 दिनों में 10 मामलों में सुनाई फांसी की सजा

रवि कुमार दिवाकर फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी हैं। उन्होंने 6 अप्रैल से 7 सितंबर तक 155 दिनों में 10 मामलों में 23 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।

मुजफ्फरनगर न्यायालय के इतिहास में इसे एक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड के तौर पर बताया जा रहा है।

Location :  Muzzaffarpur

Published :  18 September 2026, 11:07 AM IST