मुजफ्फरनगर के तावली गांव स्थित सहकारी समिति के एमडी संजीव कुमार पर किसानों ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं। जिला पंचायत सदस्य सत्येंद्र बालियान के नेतृत्व में ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की। किसानों का आरोप है कि ऋण मामलों में मनमानी और अवैध वसूली की जा रही है।

(एमडी) संजीव कुमार पर भ्रष्टाचार के आरोप
Muzaffarnagar: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में तावली गांव स्थित सहकारी समिति को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। गांव के किसानों ने समिति के प्रबंध निदेशक (एमडी) संजीव कुमार पर भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और किसानों के साथ अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर जिला पंचायत वार्ड नंबर 17 के सदस्य सत्येंद्र बालियान के नेतृत्व में ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और शिकायत पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
किसानों का कहना है कि सहकारी समिति में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस पूरे मामले की गहन जांच कराने और किसानों को राहत दिलाने की अपील की है।
ग्रामीणों के अनुसार सहकारी समिति के एमडी संजीव कुमार पिछले सात वर्षों से इसी समिति में तैनात हैं। किसानों का आरोप है कि इस दौरान उन्होंने ऋण से जुड़े मामलों में मनमानी करते हुए कई अनियमितताएं की हैं। किसानों का कहना है कि कई लोगों ने समय पर अपना ऋण चुका दिया, लेकिन इसके बावजूद उनके खातों में अतिरिक्त ब्याज जोड़ दिया गया।
इससे किसानों को आर्थिक रूप से नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि जब वे इस बारे में जानकारी लेने समिति कार्यालय पहुंचे तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की कार्यप्रणाली से किसानों में भारी नाराजगी है।
तावली सहकारी समिति के एमडी संजीव कुमार
जिला पंचायत सदस्य सत्येंद्र बालियान ने भी एमडी संजीव कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि किसानों से लोन रिन्यूअल के नाम पर लगभग पांच हजार रुपये और लोन की राशि बढ़ाने के लिए तीन हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है।
इसके अलावा आरोप है कि कई ऐसे लोगों को भी रिश्वत लेकर ऋण दिया गया है, जिन्हें अन्य बैंकों द्वारा पहले ही डिफॉल्टर घोषित किया जा चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि इस तरह की अनियमितताओं से सहकारी समिति की व्यवस्था प्रभावित हो रही है और ईमानदार किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
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ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले को लेकर पहले भी संबंधित विभाग में शिकायत की जा चुकी है। शिकायत के आधार पर 25 फरवरी 2026 को जांच के लिए एक अधिकारी को भेजा गया था। हालांकि किसानों का आरोप है कि समिति के एमडी ने जांच के दौरान अधिकारी को कोई सहयोग नहीं दिया, जिसके कारण जांच पूरी नहीं हो सकी और अधिकारी को वापस लौटना पड़ा।
अब ग्रामीणों और किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि सहकारी समिति किसानों के हित के लिए बनाई गई है, लेकिन यदि इसमें ही भ्रष्टाचार और मनमानी होगी तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। जिला पंचायत सदस्य सत्येंद्र बालियान ने भी प्रशासन से जल्द से जल्द कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि किसानों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी शिकायतें सामने न आएं।