मिर्जापुर: परमापुर जलागम में वर्षा जल संचयन से चमकी किसानों की किस्मत, कृषि को मिल रहा नया बढ़ावा

मिर्जापुर के परमापुर जलागम में जल संरक्षण और आधुनिक तकनीक से किसानों की सिंचाई समस्या दूर हुई, भूजल स्तर सुधरा और खेती को नया जीवन मिला है।

Updated : 24 October 2026, 9:57 AM IST
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Mirzapur: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। विकासखंड पटेहरा के परमापुर जलागम क्षेत्र में चलाई जा रही जल संरक्षण परियोजना अब अन्नदाताओं की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने लगी है। सरकारी दावों और विज्ञापनों से दूर, यह पहल धरातल पर किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही है। हाल ही में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) विजय कुमार सिंह ने इस परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर इसकी जमीनी हकीकत को परखा है।

किसानों के लिए वरदान बनी ICRISAT की परियोजना

यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) द्वारा संचालित की जा रही है। उत्तर प्रदेश सरकार की राज्य कृषि विकास योजना (SADP) के तहत इसे वर्ष 2025-26 से 2028-29 तक के लिए लागू किया गया है। 7,996 हेक्टेयर में फैली इस परियोजना के दायरे में कुल 23 गांव आते हैं। 1,692 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना का मूल उद्देश्य क्षेत्र के किसानों को सूखे के प्रकोप से बचाना और भूजल स्तर को सुधारना है।

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खेतों तक पहुँचा पानी, सुधरी भूजल स्थिति

परमापुर क्षेत्र में पानी की कमी हमेशा से किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है। इस समस्या से निपटने के लिए परियोजना के तहत कई बड़े कदम उठाए गए हैं-

जल संचयन बांध और नाले: क्षेत्र में 2 जल संचयन बांधों (WHBs) का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया है, साथ ही लगभग 10 किलोमीटर लंबे नाले का गहरीकरण और चौड़ीकरण भी हुआ है।

तालाब और मेड़बंदी: करीब 13 छोटे-बड़े तालाबों की खुदाई के साथ 1,000 एकड़ क्षेत्र में खेतों की मजबूत मेड़बंदी की गई है।

इन तमाम संरचनाओं के तैयार होने से लगभग 2.5 लाख घन मीटर वर्षा जल को सहेजने की क्षमता विकसित हो चुकी है, जिससे सीधे तौर पर खेती की प्यास बुझ रही है।

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जल संचयन क्षमता से चमकी खेती (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)

बागवानी और वैज्ञानिक खेती से जुड़ रहे किसान

सिंचाई के साधनों के साथ-साथ किसानों को आधुनिक और लाभकारी कृषि से जोड़ने के प्रयास भी रंग ला रहे हैं। क्षेत्र में लगभग 161 एकड़ जमीन पर मूंगफली, मूंग, तिल और अरहर जैसी प्रदर्शन फसलें उगाई गई हैं। इसके अतिरिक्त, लगभग 7 हेक्टेयर क्षेत्र में आम, अमरूद, नींबू, आंवला, बेल और एप्पल बेर के 12,100 पौधे रोपकर फलदार कृषिवानिकी को बढ़ावा दिया गया है।

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ग्राम बेलहरा में स्थापित स्वचालित मौसम प्रणाली (AWS) किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। इसके जरिए मिलने वाले सटीक मौसम पूर्वानुमान और कृषि परामर्श (Agro-Advisory) से किसान मोबाइल पर ही यह जान लेते हैं कि उन्हें फसल की बुवाई और सिंचाई कब करनी है।

किसानों ने साझा किया अपना अनुभव

निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने जब किसानों से सीधा संवाद किया, तो उन्होंने अपनी संतुष्टि जाहिर की। किसानों ने बताया कि जल संरक्षण कार्यों के कारण अब सिंचाई के लिए पानी आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा, भूजल स्तर ऊपर आने से गांवों में पेयजल की समस्या में भी काफी सुधार हुआ है।

Location :  Mirzapur

Published :  24 October 2026, 9:51 AM IST

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