सिसवा को तहसील बनाने की वर्षों पुरानी मांग को लेकर व्यापारियों का आंदोलन तेज हो गया है। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल ने 5 जनवरी 2026 को ‘सिसवा बंदी’ का ऐलान किया है। सभी दुकानें बंद रखकर शांतिपूर्ण विरोध किया जाएगा।

सिसवा नगर की एक महत्वपूर्ण बैठक
Maharajganj: सिसवा को तहसील का दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिखाई दे रही है। लंबे समय से चली आ रही इस मांग को लेकर अब स्थानीय व्यापारी संगठनों ने आंदोलन को और तेज करने का फैसला किया है। इसी क्रम में अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल, सिसवा नगर की एक महत्वपूर्ण बैठक नगर के एक स्थानीय रेस्टोरेंट में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता नगर अध्यक्ष शिब्बू खान ने की, जिसमें आगामी 5 जनवरी 2026 को प्रस्तावित 'सिसवा बंदी' को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में मौजूद पदाधिकारियों और व्यापारियों ने एक स्वर में कहा कि सिसवा क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए तहसील का गठन अब अनिवार्य हो गया है। वक्ताओं ने कहा कि तहसील नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोगों को राजस्व, न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए दूर-दराज के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
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बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 5 जनवरी को सिसवा नगर की सभी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह बंद रहेंगे। इस दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण और संगठित रखने पर जोर दिया गया। नगर अध्यक्ष शिब्बू खान ने कहा, 'यह आंदोलन किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि सिसवा के हक और उसके विकास के लिए है। जब तक सिसवा को तहसील का दर्जा नहीं मिल जाता, तब तक व्यापारी समाज और क्षेत्रवासी अपनी आवाज उठाते रहेंगे।'
उन्होंने यह भी कहा कि व्यापारियों की एकजुटता ही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है और यही एकजुटता शासन-प्रशासन तक सिसवा की आवाज पहुंचाएगी।
बैठक में संगठन की एकता और प्रतिबद्धता साफ नजर आई। महामंत्री अश्वनी रौनियार, कोषाध्यक्ष मकसूद अंसारी, नवीन मद्धेशिया, अविनाश मद्धेशिया, हरिलाल सोनी, संदीप मल्ल, संतराज विश्वकर्मा, दीपक जायसवाल, रजाऊल अंसारी, इरफान, वैष्णो कुमार सोनी, मनीष रौनियार सहित बड़ी संख्या में व्यापारी उपस्थित रहे। सभी ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए अपने-अपने स्तर से जिम्मेदारी निभाने का भरोसा दिलाया।
बैठक में यह भी तय किया गया कि यदि शासन-प्रशासन ने सिसवा को तहसील बनाने की मांग पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। भविष्य में धरना-प्रदर्शन, ज्ञापन और अन्य लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी बात रखी जाएगी। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई केवल व्यापारियों की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जनता के हित से जुड़ी हुई है।