सिसवा को तहसील का दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग अब एक जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित व्यापारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी संतोष शर्मा से मुलाकात की और इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

सिसवा को तहसील बनाने की मांग तेज
Siswa Bazar/Maharajganj: सिसवा को तहसील का दर्जा दिलाने की वर्षों पुरानी मांग अब एक जन आंदोलन का रूप लेती जा रही है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित व्यापारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी संतोष शर्मा से मुलाकात की और इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
जिला महामंत्री प्रमोद जायसवाल ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि सिसवा कस्बा, जो अब नगरपालिका बन चुका है, किसी समय जनपद का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र और थोक मंडी हुआ करता था। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासनिक सुविधाओं और सुलभ साधनों के अभाव में सिसवा का ऐतिहासिक बाजार लगातार कमजोर हो रहा है। अगर सिसवा को तहसील का दर्जा मिलता है, तो यहां व्यापारिक गतिविधियों को नई संजीवनी मिलेगी।"
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ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमोद जायसवाल ने राजनीतिक दलों पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हर चुनाव में सिसवा को तहसील बनाने का वादा कर नेता वोट तो ले लेते हैं, लेकिन जीत के बाद इस मांग को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। इसी उपेक्षा और जन आक्रोश के कारण बीते 5 जनवरी को सिसवा के सभी छोटे-बड़े दुकानदारों ने 'ऐतिहासिक बंदी' रखी थी, जिसने शासन-प्रशासन तक जनता की आवाज पहुँचाने का काम किया।
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व्यापार मंडल ने जिलाधिकारी से अपील की है कि वे अपनी प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए सिसवा का एक आधिकारिक सर्वे कराएं और इसकी रिपोर्ट तत्काल शासन को भेजें। व्यापारियों का मानना है कि तहसील बनने से न केवल राजस्व बढ़ेगा, बल्कि आम जनता को सरकारी कार्यों के लिए दूर नहीं भागना पड़ेगा।