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यूपी में सरकारी नौकरी के नियम सख्त (Img: Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए चरित्र सत्यापन के नियमों में बदलाव किया गया है। योगी सरकार ने सरकारी सेवाओं में सीधी भर्ती के लिए एक नई नीति जारी की है। इस नीति के तहत चयनित उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके पिछले इतिहास की जांच एक तय प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। यदि कोई उम्मीदवार गंभीर अपराधों या हिंसक गतिविधियों में शामिल पाया जाता है, तो उसे नौकरी के लिए अयोग्य माना जा सकता है। हालांकि, केवल FIR दर्ज होने या जांच चल रही होने के आधार पर किसी उम्मीदवार को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को केवल उसकी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नौकरी देने से मना नहीं किया जा सकता।
प्रमुख सचिव एम. देवराज द्वारा जारी नई नीति के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों को चरित्र सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही एक 'प्रोविजनल' नियुक्ति पत्र दिया जा सकता है। इसके लिए उम्मीदवारों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ एक स्व-घोषणा पत्र जमा करना होगा। हालांकि, संवेदनशील या सुरक्षा से जुड़े पदों के लिए नियुक्ति से पहले पूरी तरह से बैकग्राउंड चेक अनिवार्य होगा।
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यह व्यवस्था राज्य सरकार के विभागों, निगमों, परिषदों, शिक्षण संस्थानों, स्वायत्त निकायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), पंचायतों और स्थानीय सरकारी निकायों में होने वाली सीधी भर्तियों पर लागू होगी। यदि सत्यापन प्रक्रिया के दौरान कोई उम्मीदवार अयोग्य पाया जाता है या गलत जानकारी देता है, तो उसकी नियुक्ति रद्द की जा सकती है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
नई नीति में हत्या, दंगा, बलात्कार, दहेज हत्या, फिरौती के लिए अपहरण और POCSO एक्ट के तहत आने वाले गंभीर अपराध शामिल हैं। ऐसे मामलों में यदि किसी उम्मीदवार के खिलाफ आरोप तय होते हैं या उसे दोषी ठहराया जाता है, तो वह सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य हो सकता है। इसके अलावा, ये नियम उन लोगों पर भी लागू होंगे जो परीक्षा के पेपर लीक करने, संगठित तरीके से नकल कराने, परीक्षा देने के लिए 'सॉल्वर' (नकली परीक्षार्थी) बिठाने, या फर्जी प्रमाण पत्र हासिल करने जैसी गतिविधियों में शामिल हैं। यह नीति 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' और 'गैंगस्टर्स एक्ट' के तहत आने वाले मामलों पर भी लागू होती है।
नई व्यवस्था के तहत नियुक्ति करने वाला प्राधिकरण उम्मीदवार का विवरण संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को भेजेगा। सामान्य मामलों में, पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाई उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर वेरिफिकेशन करेंगी। यदि आवश्यक हुआ तो विशेष जांच भी शुरू की जा सकती है।
यदि पुलिस रिपोर्ट प्रतिकूल (नकारात्मक) आती है, तो जिला मजिस्ट्रेट उम्मीदवार को अपना पक्ष रखने का अवसर देंगे। उम्मीदवारों को अपने आवेदन और स्व-घोषणा पत्र में गिरफ्तारी, कानूनी कार्यवाही, दोषसिद्धि, पिछली नौकरी से बर्खास्तगी, या अनुचित साधनों के उपयोग के कारण भर्ती परीक्षाओं से प्रतिबंधित किए जाने से संबंधित कोई भी जानकारी देनी होगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि चरित्र सत्यापन प्रक्रिया के दौरान गलत जानकारी सामने आती है या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए जाते हैं, तो नियुक्ति रद्द की जा सकती है। हालांकि, किसी उम्मीदवार के खिलाफ केवल आपराधिक मामला दर्ज होने का मतलब यह नहीं है कि वह अयोग्य हो जाएगा। पात्रता का निर्धारण मामले की प्रकृति और नई नीति में निर्धारित शर्तों के आधार पर किया जाएगा।
इस नई नीति का उद्देश्य भर्ती के बाद की सत्यापन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और नियुक्तियों में होने वाली अनावश्यक देरी को कम करना है। सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके आवेदन में दी गई सभी जानकारी सही हो और वे आपराधिक मामलों या पूर्व में प्रतिबंधित किए जाने से जुड़ी कोई भी जानकारी न छिपाएं।
Location : New Delhi
Published : 29 October 2026, 1:47 PM IST
Topics : Character Verification Rules UP Government Jobs Rules UP News Uttar Pradesh government jobs Yogi Adityanath