बायोमीट्रिक गेट बना मौत का जाल, इमरजेंसी एग्जिट भी नहीं; लखनऊ अग्निकांड ने खोली सिस्टम की पोल, 15 मौतों का दोषी कौन?

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में बायोमीट्रिक गेट, इमरजेंसी एग्जिट की कमी और फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी बड़े सवाल खड़े कर रही है। गेमिंग जोन में फंसे बच्चों को बचने का रास्ता नहीं मिला। क्या यह सिर्फ हादसा था या सिस्टम की गंभीर नाकामी?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 June 2026, 10:36 AM IST

Lucknow: अलीगंज स्थित तीन मंजिला इमारत में हुए भीषण अग्निकांड ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में 15 बच्चों समेत कई लोगों की मौत हो गई, जबकि अनेक घायल हुए। प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्य यह संकेत दे रहे हैं कि यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और सिस्टम की नाकामी का परिणाम हो सकता है।

बायोमीट्रिक गेट बना जानलेवा बाधा

हादसे के समय बिल्डिंग की दूसरी मंजिल पर संचालित गेमिंग और एनीमेशन सेंटर में मौजूद बच्चों और कर्मचारियों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल वहां लगा बायोमीट्रिक थम्ब-इम्प्रेशन गेट बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के अनुसार, आग लगने के बाद ऑटोमैटिक लॉकिंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। जिस दरवाजे से कुछ मिनटों में सुरक्षित बाहर निकला जा सकता था, वही लोगों के लिए मौत का जाल बन गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि गेमिंग सेंटर में कोई वैकल्पिक निकास मार्ग (इमरजेंसी एग्जिट) नहीं था। आग और धुएं से घिरे बच्चों के पास बाहर निकलने का दूसरा रास्ता नहीं बचा। कई बच्चे जान बचाने के लिए खिड़कियों और पाइपलाइन के सहारे नीचे उतरने की कोशिश करते रहे, जबकि कुछ ने जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगा दी।

लखनऊ अग्निकांड: साथ पढ़ाई, साथ नौकरी और मौत भी आई एक साथ; पढ़ें दो दोस्तों की रोंगटे खड़े करने वाली कहानी

इमरजेंसी एग्जिट नहीं, छत का रास्ता भी बंद

हादसे के दौरान इमारत की छत पर जाने वाला रास्ता भी बंद मिला। यदि छत तक पहुंचने का मार्ग खुला होता तो कई लोगों को सुरक्षित स्थान मिल सकता था। लेकिन एकमात्र निकास द्वार के जाम हो जाने के बाद अंदर फंसे लोगों के लिए बचने की कोई संभावना नहीं बची।

तीनों ओर से दूसरी इमारतों से घिरी इस बिल्डिंग में आग आगे के हिस्से से शुरू हुई थी। दहशत में लोग पीछे की ओर भागे, लेकिन कुछ ही देर में धुआं और आग पूरे परिसर में फैल गई। अधिकांश मौतें जलने से नहीं बल्कि दम घुटने से हुईं।

हादसा नहीं, सुरक्षा मानकों की खुली अनदेखी?

अग्निशमन विभाग की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाली लापरवाहियां सामने आई हैं। इमारत में न तो स्मोक डिटेक्टर लगे थे और न ही पर्याप्त फायर एक्सटिंग्यूशर मौजूद थे। आग लगने के शुरुआती महत्वपूर्ण मिनटों में उसे नियंत्रित करने का कोई इंतजाम नहीं था।

और भी गंभीर तथ्य यह है कि आवासीय उपयोग के लिए बनी इस इमारत में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। यहां गेमिंग जोन, पेट शॉप और अन्य दुकानें चल रही थीं। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में इस अवैध निर्माण को गिराने का आदेश भी जारी हुआ था, लेकिन बाद में वह आदेश वापस ले लिया गया।

Lucknow Coaching Fire: कोचिंग में पढ़ रहे थे छात्र, तभी नीचे दुकान में उठीं आग की लपटें… अलीगंज में अचानक ये क्या हुआ?

फ्रीजर में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका

जांच एजेंसियों के मुताबिक, ग्राउंड फ्लोर पर रखे एक फ्रीजर में शॉर्ट सर्किट होने से आग भड़कने की संभावना है। आग तेजी से एसी डक्ट तक पहुंची और कंप्रेसर फटने के बाद पूरे फ्लोर में जहरीला धुआं भर गया। देखते ही देखते पूरा भवन धुएं और आग की चपेट में आ गया।

बाथरूम में छिपे बच्चे, धुएं ने ली जान

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई बच्चे आग और गर्मी से बचने के लिए बाथरूम में जाकर छिप गए। उन्होंने नल खोलकर पानी बहाया ताकि आग अंदर न पहुंचे, लेकिन बंद जगह में धुआं भरने से उनका दम घुट गया। जब तक राहत दल पहुंचा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

दीवारें तोड़कर पहुंची दमकल टीम

दमकल कर्मियों को अंदर पहुंचने के लिए पड़ोसी इमारतों की दीवारें तोड़नी पड़ीं। आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि राहत एवं बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो गया। परिजनों की चीख-पुकार के बीच बचाव दल लगातार लोगों को निकालने की कोशिश करता रहा, लेकिन कई जिंदगियां बचाई नहीं जा सकीं।

जिम्मेदार कौन?

हादसे के बाद पुलिस ने इमारत मालिकों समेत चार लोगों- रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू को गिरफ्तार किया है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर भवन में फायर सेफ्टी के नियम लागू होते, इमरजेंसी एग्जिट मौजूद होता, बायोमीट्रिक गेट के साथ मैनुअल निकास व्यवस्था होती और अवैध संचालन पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो क्या इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी?

लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन खामियों की दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आया है, जहां तकनीकी व्यवस्थाएं सुरक्षा के बजाय खतरा बन गईं और निगरानी तंत्र की लापरवाही ने मासूम जिंदगियों की कीमत वसूल ली।

Location :  Lucknow

Published :  23 June 2026, 10:36 AM IST