कुशीनगर में “इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव 2026” के दूसरे दिन खेल, निवेश और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। जिसमें पर्यटन, उद्योग और रोजगार की संभावनाओं पर गहन चर्चा की गई।

कुशीनगर में इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव का दूसरा दिन
Kushinagar: इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्क्लेव-2026 के दूसरे दिन कुशीनगर में विकास, निवेश और पर्यटन को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई, जहां एक तरफ मंच से बड़े-बड़े निवेश के दावे हुए तो दूसरी ओर जमीनी स्तर पर युवाओं और स्थानीय प्रतिभाओं को जोड़ने की कोशिश भी दिखी। आयोजन में जोश, उत्साह और योजनाओं का ऐसा मेल देखने को मिला, जिसने जिले को नई पहचान देने की दिशा में कदम बढ़ा दिया।
दौड़ प्रतियोगिता में दिखा जोश
कॉन्क्लेव के तहत आयोजित दौड़ प्रतियोगिता में युवाओं, छात्रों और स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि राकेश जायसवाल और जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस दौरान मंच से फिटनेस, अनुशासन और एकता का संदेश दिया गया। प्रतियोगिता के अंत में सभी प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया, जिससे युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
निवेश और उद्योग पर बड़ा मंथन
दूसरे दिन का सबसे अहम हिस्सा रहा निवेश सत्र, जहां खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और बायो-सीएनजी प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा हुई। सांसद विजय कुमार दुबे ने कुशीनगर को पर्यटन और कृषि दोनों के लिहाज से मजबूत बताते हुए निवेशकों को खुला आमंत्रण दिया। इस दौरान बताया गया कि प्रदेश में बड़े स्तर पर बायो-सीएनजी प्लांट लगाए जा रहे हैं, जिनमें पराली का इस्तेमाल होगा। करीब ₹3000 करोड़ के निवेश की इस योजना से रोजगार के हजारों मौके बनने की उम्मीद जताई गई।
पर्यटन को ग्लोबल पहचान देने की तैयारी
अपर मुख्य सचिव पर्यटन मुकेश मेश्राम ने कहा कि कुशीनगर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, बेहतर सड़कें और होटल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। पैनल डिस्कशन में हेरिटेज डेवलपमेंट, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर और एयर कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई।
शैक्षणिक गतिविधियों में प्रतिभा का प्रदर्शन
कॉन्क्लेव के दौरान वाद-विवाद प्रतियोगिता में छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं की घोषणा की गई और उन्हें सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में नेपाल, थाईलैंड सहित अन्य देशों से आए बौद्ध भिक्षुओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया, जिससे आयोजन को अंतरराष्ट्रीय रंग मिला।