
प्रतीकात्मक छवि (AI Generated Image)
Kanpur: करवाचौथ का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। सुहागिनों के इस खास पर्व के लिए महिलाएं खरीदारी की तैयारी कर रही हैं, वहीं कानपुर के लक्ष्मी पुरवा स्थित कुम्हार मंडी में कारीगर मिट्टी के करवे तैयार करने में जुटे हैं। यहां मिट्टी से तैयार होने वाला हर करवा सिर्फ पूजा की परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि कई परिवारों की आजीविका का सहारा भी है। त्योहार के दौरान अच्छी बिक्री की उम्मीद में कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
कुम्हार मंडी में करवाचौथ के लिए करवे बनाने का काम त्योहार से करीब एक महीने पहले शुरू हो जाता है। कारीगर सबसे पहले मिट्टी तैयार करते हैं। इसके बाद चाक पर उसे आकार देकर करवे बनाए जाते हैं। फिर इन्हें सुखाया जाता है और भट्टी में पकाया जाता है।
कारीगरों के मुताबिक, करवे पकाने में करीब 15 से 18 घंटे लगते हैं। इस प्रक्रिया के बाद उनकी रंगाई और सजावट की जाती है, जिससे वे बाजार में बिक्री के लिए तैयार हो जाते हैं।
कुम्हार मंडी में इन दिनों घरों के लगभग सभी सदस्य काम में हाथ बंटा रहे हैं। कोई चाक पर करवे बना रहा है, तो कोई उन पर रंग और डिजाइन तैयार कर रहा है। परिवार के दूसरे सदस्य तैयार करवे छांटने और उनकी पैकिंग करने में जुटे हैं।
कारीगरों का कहना है कि करवाचौथ के दौरान समय पर माल तैयार करना जरूरी होता है। कुछ लोग नौकरी से छुट्टी लेकर परिवार की मदद करने पहुंचते हैं, ताकि त्योहार से पहले अधिक से अधिक करवे बाजार तक पहुंचाए जा सकें।
करवा चौथ की तैयारी शुरू (Source: Pinterest)
कारीगरों के अनुसार, यहां कुछ लोग एक दिन में 200 से 300 तक करवे तैयार कर लेते हैं। बाजार में अलग-अलग आकार और डिजाइन के करवे बनाए जा रहे हैं। कुछ ग्राहक साधारण मिट्टी के करवे पसंद करते हैं, जबकि कुछ की मांग सजावटी डिजाइन वाले करवों के लिए रहती है।
कारीगरों का कहना है कि मिट्टी और अन्य जरूरी सामान की लागत बढ़ने से खर्च का दबाव बना रहता है, लेकिन यही काम उनके परिवारों की कमाई का प्रमुख जरिया है।
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बाजार में नए विकल्प आने के बावजूद करवाचौथ की पूजा में मिट्टी के करवों का पारंपरिक महत्व बना हुआ है। कुम्हार परिवारों के लिए यह त्योहार सालाना कमाई का एक अहम अवसर लेकर आता है।
मिट्टी जुटाने से लेकर चाक पर आकार देने, भट्टी में पकाने, रंगाई और पैकिंग तक हर चरण में मेहनत लगती है। इसके बाद ही करवे दुकानों और बाजारों तक पहुंचते हैं। इस तरह कानपुर की कुम्हार मंडी में करवाचौथ की तैयारी के साथ परंपरा, कारीगरी और परिवारों के रोजगार का सिलसिला भी आगे बढ़ रहा है।
Location : Kanpur
Published : 25 October 2026, 4:00 PM IST