अचानक गायब हुई वो महिला और शुरू हुई ताले की परंपरा! जानिए कानपुर की संकरी गलियों में स्थित 350 साल पुराने मंदिर का अनसुना राज

कानपुर की तंग गलियों में स्थित इस मंदिर में भक्त अपनी मन्नत के लिए ताला चढ़ाते हैं। मान्यता है कि इच्छा पूरी होने पर उसी ताले को खोलकर ले जाया जाता है। आखिर क्या है ‘ताला वाली देवी’ मंदिर से जुड़ी यह अनोखी परंपरा?

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 14 October 2026, 1:25 PM IST
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Kanpur: उत्तर प्रदेश के कानपुर की पुरानी और तंग गलियों के बीच मां काली का एक प्राचीन मंदिर स्थित है, जो अपनी अनोखी परंपरा के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है। यहां भक्त अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और मंदिर परिसर में ताला चढ़ाते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब उनकी मुराद पूरी हो जाती है, तो वे उसी ताले को खोलकर अपने साथ ले जाते हैं। इसी परंपरा के चलते इस मंदिर को ‘ताला वाली देवी’ के नाम से भी जाना जाता है।

ताले से जुड़ी है मनोकामना पूरी होने की मान्यता

कानपुर के बंगाली मोहल्ले में शिवाला के पास स्थित इस मंदिर को स्थानीय लोग करीब 350 साल पुराना बताते हैं। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पुरानी और संकरी गलियों से होकर गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद मां काली के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए यहां भक्त पहुंचते हैं।

स्थानीय मान्यताओं के मुताबिक, श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हुए मंदिर में ताला चढ़ाते हैं। उनकी मान्यता है कि मन्नत पूरी होने के बाद ताला खोलकर अपने साथ ले जाना चाहिए। इसी परंपरा ने मंदिर को एक अलग पहचान दी है और भक्त इसे ‘ताला वाली देवी’ के नाम से पुकारते हैं।

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स्वप्न में दर्शन से जुड़ी कथा भी प्रचलित

मंदिर से जुड़ी एक प्रचलित कथा के अनुसार, कई वर्ष पहले एक महिला नियमित रूप से मां काली के दर्शन करने आती थी। बताया जाता है कि एक दिन वह मंदिर परिसर में ताला लगा रही थी। इसी दौरान पुजारी ने उससे ताला लगाने को कहा।

स्थानीय कथा में महिला के अचानक गायब होने और बाद में ताला वहां नहीं मिलने का भी जिक्र किया जाता है। मान्यता है कि महिला की मनोकामना पूरी हो गई थी, जिसके बाद वह ताला खोलकर अपने साथ ले गई। कहा जाता है कि इसी घटना के बाद मंदिर में मन्नत के लिए ताला चढ़ाने की परंपरा प्रचलित हुई। हालांकि, यह कथा स्थानीय मान्यता के रूप में सुनाई जाती है।

नवरात्र में बढ़ जाती है श्रद्धालुओं की भीड़

मंदिर की देखरेख एक बंगाली परिवार पीढ़ी-दर-पीढ़ी करता आ रहा है। मंदिर के पुजारी आकाश बनर्जी के मुताबिक, नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। मां काली के दर्शन करने के लिए दूर-दराज के इलाकों के अलावा विदेशों से भी भक्त पहुंचते हैं।

इस दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और भव्य आरती आयोजित की जाती है। मां को भोग लगाया जाता है और श्रद्धालु धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होकर आशीर्वाद लेते हैं।

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कानपुर की धार्मिक विरासत का हिस्सा है मंदिर

पुरानी गलियों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी परंपरा और स्थानीय मान्यताओं के कारण कानपुर की धार्मिक विरासत में विशेष स्थान रखता है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ताला चढ़ाने और मन्नत पूरी होने पर उसे खोलकर ले जाने की परंपरा आस्था का प्रतीक है। नवरात्र के दौरान मंदिर में होने वाली पूजा-अर्चना और आरती इसके धार्मिक महत्व को और बढ़ा देती है।

Location :  Kanpur

Published :  14 October 2026, 1:25 PM IST

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