
Akhilesh Yadav (IMG: Social Media)
New Delhi: उत्तर प्रदेश की सियासत में कुछ सीटें ऐसी हैं जहां चुनावी मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों और बदलते वोटबैंक के बीच होता है। सुल्तानपुर जिले की कादीपुर विधानसभा सीट भी ऐसी ही एक सीट है। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट कभी बहुजन समाज पार्टी का मजबूत किला मानी जाती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां की राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदली है। अब यह सीट भारतीय जनता पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शामिल हो चुकी है। हालांकि, 2024 लोकसभा चुनाव के बाद बदले माहौल ने यहां फिर से सियासी हलचल बढ़ा दी है।
कभी BSP का गढ़, अब BJP का मजबूत ठिकाना
कादीपुर विधानसभा सीट पर साल 1977 से 2022 तक कुल 12 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इस दौरान भारतीय जनता पार्टी ने सबसे ज्यादा चार बार जीत हासिल की है। वहीं बहुजन समाज पार्टी ने तीन बार, कांग्रेस ने तीन बार, समाजवादी पार्टी ने एक बार और जनता पार्टी ने एक बार यहां जीत दर्ज की। बीएसपी भले ही इस सीट पर तीन बार चुनाव जीत चुकी है, लेकिन 1996, 2012 और 2017 के चुनावों में उसे हार का सामना करते हुए दूसरे स्थान पर रहना पड़ा। साल 2017 के बाद मोदी लहर में यहां का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया और बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली।
राजेश गौतम ने बदली BJP की तस्वीर
साल 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने नई रणनीति के तहत राजेश कुमार गौतम को मैदान में उतारा। राजेश गौतम ने 87,353 वोट हासिल कर बीएसपी के दिग्गज नेता भगेलू राम को 26,604 वोटों के बड़े अंतर से हराया और पहली बार बीजेपी को इस सीट पर बड़ी सफलता दिलाई। इसके बाद 2022 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर राजेश गौतम पर भरोसा जताया। इस बार मुकाबला और दिलचस्प था, क्योंकि बीएसपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में आए भगेलू राम सपा के टिकट पर मैदान में थे। राजेश गौतम ने 96,405 वोट हासिल करते हुए भगेलू राम को 25,723 वोटों से मात दी और लगातार दूसरी बार विधायक बने।
दलित वोट और जातीय समीकरण तय करेंगे मुकाबला
कादीपुर सुरक्षित सीट होने के कारण यहां दलित मतदाता सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इस विधानसभा क्षेत्र में दलित मतदाताओं की संख्या 26 फीसदी से ज्यादा है। इसके अलावा मौर्य, यादव, निषाद और कुर्मी समाज के मतदाता भी चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। एक समय बीएसपी का कैडर वोट बैंक यहां काफी मजबूत माना जाता था, लेकिन पिछले दो चुनावों के नतीजे बताते हैं कि उसका पारंपरिक वोट बैंक धीरे-धीरे बीजेपी और समाजवादी पार्टी की ओर गया है। 2022 में बीएसपी का वोट शेयर घटकर करीब 21 फीसदी रह गया, जिससे मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी और सपा के बीच सिमट गया।
सपा का PDA दांव, BJP के सामने चुनौती
2024 लोकसभा चुनाव में सुल्तानपुर सीट पर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के रामभुआल निषाद ने बीजेपी की दिग्गज नेता मेनका गांधी को हराकर सभी को चौंका दिया। इस नतीजे का असर कादीपुर विधानसभा सीट के समीकरणों पर भी पड़ा है। समाजवादी पार्टी अब अखिलेश यादव के PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले के जरिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी दलित और पिछड़े वोटरों को जोड़ने के साथ-साथ ब्राह्मण वोटरों को भी अपने साथ लाने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं बीजेपी अपने मजबूत संगठन, केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों और अपने पारंपरिक वोट बैंक के सहारे कादीपुर में अपना दबदबा बनाए रखने की कोशिश करेगी।
2027 में होगी BJP और SP की बड़ी परीक्षा
कादीपुर विधानसभा सीट पर लगातार दो जीत के बाद बीजेपी ने अपना मजबूत आधार तैयार कर लिया है, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल और सपा की बढ़ती सक्रियता ने मुकाबले को फिर से रोचक बना दिया है। आने वाले विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या बीजेपी अपना सुरक्षित किला बचा पाएगी या फिर अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला यहां नया राजनीतिक समीकरण तैयार करेगा।
Location : Sultanpur
Published : 6 August 2026, 7:41 PM IST