
Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के खजनी क्षेत्र में सरकार गांवों के विकास के लिए लगातार धन खर्च करने और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने का दावा कर रही है, लेकिन विकास खंड खजनी की ग्राम सभा सतुआभार में तस्वीर इन दावों से अलग नजर आ रही है। यहां हरिजन बस्ती में क्षतिग्रस्त इंटरलॉकिंग खड़ंजे की मरम्मत के लिए ग्रामीणों को खुद आगे आना पड़ा। सरकारी व्यवस्था का इंतजार करने के बजाय ग्रामीणों ने श्रमदान कर गांव की सड़क को दुरुस्त करने की पहल शुरू कर दी।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में विकास कार्यों के लिए धन और योजनाओं की कमी नहीं होने की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरी कार्यों की स्थिति कई सवाल खड़े करती है। लंबे समय से खराब पड़े इंटरलॉकिंग खड़ंजे की मरम्मत नहीं होने से लोगों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही थी। बारिश के दौरान स्थिति और खराब हो जाती थी। ऐसे में ग्रामीणों ने आपस में मिलकर सड़क की मरम्मत करने का निर्णय लिया।
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रविवार व सोमवार को ग्रामीणों ने श्रमदान करते हुए क्षतिग्रस्त इंटरलॉकिंग खड़ंजे को व्यवस्थित करने का काम शुरू किया। ग्रामीणों ने खुद इंटरलॉकिंग ईंटों को निकालकर उन्हें सही स्थान पर लगाने और रास्ते को चलने योग्य बनाने का प्रयास किया। इस दौरान इन्द्रदेव, अखिलेश, सत्येंद्र, दीपक, रजनीकांत समेत कई ग्रामीणों ने श्रमदान किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में विकास कार्यों को लेकर सरकारी स्तर पर योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति धरातल पर दिखाई नहीं देती। ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में हुए पूर्व के विकास कार्यों की भी जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि पंचायत स्तर पर नियमित रूप से मरम्मत और देखरेख होती तो ग्रामीणों को अपने स्तर पर श्रमदान करने की जरूरत नहीं पड़ती।
ग्रामीणों द्वारा स्वयं खड़ंजे की मरम्मत किए जाने की तस्वीर अब गांव में विकास कार्यों की हकीकत और जिम्मेदार तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से गांव की समस्याओं का स्थायी समाधान कराने और विकास कार्यों की जमीनी स्थिति की जांच कराने की मांग की है।
Location : Gorakhpur
Published : 22 September 2026, 1:57 PM IST