नहर में कैसे फंसी गर्भवती गंगा डॉल्फिन? पांच विभागों ने मिलकर ऐसे बचाई जान

तीन दिनों तक देवरिया कैनाल में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही गर्भवती गंगा डॉल्फिन को आखिरकार सुरक्षित बचा लिया गया। करीब 7 फीट 2 इंच लंबी और 147 किलोग्राम वजनी इस मादा डॉल्फिन के रेस्क्यू के लिए वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन, सिंचाई विभाग और पुलिस ने अभूतपूर्व तालमेल दिखाया।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 21 July 2026, 5:27 AM IST

Gorakhpur: तीन दिनों तक देवरिया कैनाल में फंसी रही एक गर्भवती गंगा डॉल्फिन को रविवार को वन विभाग, गोरखपुर चिड़ियाघर, टीएसए फाउंडेशन, सिंचाई विभाग और गोरखपुर पुलिस के संयुक्त अभियान से सुरक्षित रेस्क्यू कर राप्ती नदी में छोड़ दिया गया। लगभग 7 फीट 2 इंच लंबी और 147 किलोग्राम वजनी इस मादा डॉल्फिन को बचाने के लिए कई विभागों ने अभूतपूर्व समन्वय दिखाया। पूरे अभियान में गोरखपुर पुलिस द्वारा बनाया गया 52 किलोमीटर लंबा ग्रीन कॉरिडोर भी चर्चा का केंद्र रहा।

देवरिया कैनाल पहुंची डॉल्फिन

जानकारी के अनुसार, त्रिवेणी नदी से भटककर यह डॉल्फिन देवरिया कैनाल में पहुंच गई थी और धीरे-धीरे बहते हुए परतावल क्षेत्र के धरमौली बाजार के पास फंस गई। लगातार तीन दिनों तक उसके कैनाल में रहने से उसकी जान पर खतरा मंडरा रहा था। शनिवार को भी उसे निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन लगातार बारिश, कैनाल में अधिक पानी और तेज बहाव के कारण सफलता नहीं मिल सकी।

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कैनाल का जलस्तर कम कराया गया

प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) उत्तर प्रदेश श्रीमती अनुराधा बेमुरी तथा मुख्य वन संरक्षक गोरखपुर बी.सी. ब्रह्मा के निर्देशन में अभियान को और तेज किया गया। सिंचाई विभाग के सहयोग से कैनाल का जलस्तर कम कराया गया, जिसके बाद कुशीनगर वन प्रभाग की हाटा रेंज अंतर्गत सिसवां शुक्ल ग्राम सभा के पास सफल रेस्क्यू अभियान चलाया गया।

गोरखपुर चिड़ियाघर के उपनिदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह तथा टीएसए फाउंडेशन इंडिया के डॉ. शैलेन्द्र सिंह के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने बेहद सावधानी से डॉल्फिन को बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद उसे विशेष डॉल्फिन एम्बुलेंस में रखा गया, जहां प्राथमिक उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। जांच में पता चला कि डॉल्फिन गर्भवती है, इसलिए उसे जल्द से जल्द सुरक्षित प्राकृतिक आवास में पहुंचाना आवश्यक था।

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राप्ती नदी में छोडां गया

इसके बाद गोरखपुर पुलिस ने भटहट से राजघाट तक करीब 52 किलोमीटर का ग्रीन कॉरिडोर तैयार कराया। एम्बुलेंस ने रिकॉर्ड समय में मात्र 1 घंटा 5 मिनट में यह दूरी तय की और डॉल्फिन को राजघाट के पास राप्ती नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

Location :  Gorakhpur

Published :  21 July 2026, 5:22 AM IST