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उद्घोषणा आदेश की अवहेलना मामले में हुआ फैसला (Img: Dynamite News)
Gorakhpur: न्यायालय के आदेश की अनदेखी करने से जुड़े एक मामले में गोरखपुर की अदालत ने डॉ. रामखेलावन दुबे को पांच वर्ष चार माह के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उन पर एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। मामला न्यायालय से जारी उद्घोषणा आदेश के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं होने से जुड़ा है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम की अदालत ने सुनाया।
पुलिस के मुताबिक, यह मामला वर्ष 2018 में बांसगांव थाने में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 384/2018 से संबंधित है। डॉ. रामखेलावन दुबे पुत्र हरीराम दुबे, निवासी पड़ियापार, थाना खजनी, गोरखपुर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 174ए के तहत मामला दर्ज किया गया था।
यह धारा न्यायालय की ओर से जारी उद्घोषणा के बाद भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपस्थित नहीं होने से जुड़े अपराध पर लागू होती है। ऐसे मामलों में अदालत के आदेश का पालन नहीं करना कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकता है।
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मामले की सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने अभियुक्त को दोषी ठहराया। इसके बाद पांच वर्ष चार माह के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
वर्ष 2018 में दर्ज मामले में फैसला आने के साथ एक बार फिर न्यायालय की प्रक्रिया और आदेशों के पालन का सवाल सामने आया है। पुलिस के अनुसार, मुकदमे की सुनवाई के दौरान बांसगांव थाने के पैरोकार और मॉनिटरिंग सेल ने मामले की निगरानी की। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सौरभ श्रीवास्तव और रविन्द्र यादव ने पैरवी की।
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यह मामला उत्तर प्रदेश पुलिस के ऑपरेशन कनविक्शन अभियान के तहत प्रभावी पैरवी किए जाने वाले मामलों में शामिल बताया गया है। इस अभियान का उद्देश्य आपराधिक मामलों में अभियोजन को मजबूत करना और न्यायालय में दोष सिद्ध होने पर सजा सुनिश्चित कराने में मदद करना है।
Location : Gorakhpur
Published : 13 October 2026, 8:41 PM IST