Gorakhpur: प्रतिबंधित चाइनीज मांझे ने ली युवक की जान, चौकी प्रभारी पर गिरी गाज

गोरखपुर में जानलेवा प्रतिबंधित चाइनीज मांझा ने एक परिवार की खुशियां छीन ली। आखिर एक खतरनाक डोर ने एक परिवार को उजाड़ दिया। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 11 October 2026, 1:45 AM IST

Gorakhpur: प्रतिबंधित चाइनीज मांझे की जानलेवा धार ने एक बार फिर शहर में एक परिवार की खुशियां छीन लीं। तिवारीपुर थाना क्षेत्र के इलाहीबाग बंधे पर शनिवार को सूरजकुंड निवासी 35 वर्षीय रमेश कन्नौजिया की गर्दन प्रतिबंधित मांझे की चपेट में आ गई।

गंभीर रूप से घायल रमेश को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने मामले में गैर इरादतन हत्या समेत सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, लापरवाही के आरोप में स्थानीय चौकी प्रभारी को निलंबित कर दिया गया।

घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने प्रतिबंधित मांझे की बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ अगले 48 घंटे तक विशेष सघन अभियान चलाने का ऐलान किया है। पुलिस अधीक्षक नगर निमिष पाटिल के मुताबिक अभियान के दौरान प्रतिबंधित मांझे की बिक्री करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अभियान सिर्फ फुटकर दुकानदारों तक सीमित रहेगा या प्रतिबंधित मांझे के पीछे सक्रिय बड़े सप्लायरों और थोक कारोबारियों तक भी पुलिस पहुंचेगी।

 हादसे के बाद जागती पुलिस

चाइनीज मांझे से हादसे का यह पहला मामला नहीं है। हर बार किसी व्यक्ति के घायल होने या मौत के बाद पुलिस की टीमें सक्रिय होती हैं। दुकानों और गुमटियों पर छापेमारी कर कुछ चरखियां और रील बरामद की जाती हैं तथा कार्रवाई की तस्वीरें सामने आती हैं। लेकिन कुछ समय बाद अभियान की रफ्तार थम जाती है और प्रतिबंधित मांझे की बिक्री फिर शुरू होने के आरोप सामने आने लगते हैं।

इस बार चौकी प्रभारी के निलंबन के साथ 48 घंटे का विशेष अभियान शुरू किया गया है। ऐसे में पुलिस के सामने चुनौती केवल कार्रवाई दिखाने की नहीं, बल्कि प्रतिबंधित मांझे की पूरी आपूर्ति श्रृंखला तक पहुंचने की है।

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थोक सप्लायरों तक कब पहुंचेगी पुलिस की जांच

शहर में प्रतिबंधित मांझा आखिर कहां से आ रहा है, कौन इसकी आपूर्ति कर रहा है और किन दुकानों तक इसकी खेप पहुंच रही है—इन सवालों के जवाब जांच की दिशा तय करेंगे। यदि कार्रवाई केवल फुटकर विक्रेताओं तक सीमित रही तो अभियान का असर स्थायी नहीं होगा।

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पुलिस के दावे फेल

रमेश की मौत ने पुलिस की निगरानी व्यवस्था और प्रतिबंधित मांझे की बिक्री पर नियंत्रण के दावों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि 48 घंटे का अभियान महज औपचारिकता बनता है या पुलिस इस बार आपूर्ति नेटवर्क तक पहुंचकर निर्णायक कार्रवाई करती है।

Location :  Gorakhpur

Published :  11 October 2026, 1:41 AM IST